
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उनकी 300 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां जब्त कर ली हैं। इस कार्रवाई के तहत कुल 142 संपत्तियां सीज की गई हैं, जो अलग-अलग लोगों के नाम पर रजिस्टर्ड थीं।
मामला क्या है?
ED के बयान के अनुसार, ये संपत्तियां उन लोगों के नाम पर थीं, जो रियल एस्टेट व्यवसायी या एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे। यह कार्रवाई मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले के तहत की गई है।
सिद्धारमैया पर लगे आरोप
सिद्धारमैया और उनके परिवार के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
1. प्लॉट की कीमतों में असमानता:
सिद्धारमैया की पत्नी को MUDA की ओर से मुआवजे के रूप में जो प्लॉट मिला, उसकी कीमत कसारे गांव की उनकी जमीन से कहीं ज्यादा बताई जा रही है।
2. डॉक्युमेंट्स में जालसाजी का आरोप:
स्नेहमयी कृष्णा नामक व्यक्ति ने सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने MUDA साइट को पारिवारिक संपत्ति के रूप में दिखाने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर की।
3. पद के दुरुपयोग का मामला:
1998 से 2023 तक सिद्धारमैया ने कर्नाटक में उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे प्रभावशाली पदों पर रहते हुए कथित तौर पर अपने करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया।
142 संपत्तियां जब्त
ED ने बताया कि जब्त की गई 142 संपत्तियां अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर थीं। हालांकि, जांच में पाया गया कि इन संपत्तियों का संबंध सीधे या परोक्ष रूप से सिद्धारमैया और उनके करीबियों से है।
राजनीतिक प्रभाव और जांच
सिद्धारमैया लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता रहे हैं। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप और अब की गई कार्रवाई ने उनकी छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे की कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। संपत्तियों की जब्ती के अलावा, ED अन्य संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
निष्कर्ष
सिद्धारमैया पर लगे आरोप न केवल उनकी राजनीतिक छवि को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि कर्नाटक की राजनीति में भी हलचल पैदा कर रहे हैं। ED की इस कार्रवाई ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत किया है।