
मसूरी (उत्तराखंड):
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में मिड-कैरियर प्रशिक्षण के लिए पहुंचे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के साथ विशेष संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक एकतरफा व्याख्यान के बजाय खुली और सहभागी चर्चा को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों के अनुभवों और सुझावों को सुना।
🔹 दो दशक का अनुभव, नई सोच के साथ संवाद
इस कार्यक्रम में वर्ष 2002 से 2008 बैच के IAS अधिकारी शामिल हुए, जो अपने-अपने राज्यों में लगभग 20 वर्षों की प्रशासनिक सेवा देने के बाद मिड-कैरियर प्रशिक्षण के लिए अकादमी लौटे हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इतने वर्षों का प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों से संवाद करना बेहद उपयोगी और प्रेरणादायक रहा।
🗣️ एकतरफा भाषण नहीं, दो-तरफा संवाद पर जोर
डॉ. सिंह ने बताया कि उन्होंने अकादमी के निदेशक श्री श्रीराम तरानीकांति से अनुरोध किया कि पारंपरिक व्याख्यान के बजाय एक खुला संवाद आयोजित किया जाए। उनका मानना था कि अधिकारियों के अनुभवों, चुनौतियों और अपेक्षाओं को समझना अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन में बेहतर परिणाम तभी संभव हैं जब वरिष्ठ नेतृत्व और अधिकारी एक-दूसरे से सीखने की संस्कृति विकसित करें।
📚 बदलते प्रशासनिक दौर की नई सोच
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि लंबे और एकतरफा भाषणों की परंपरा से आगे बढ़कर संवाद, सहयोग और साझा सीखने की संस्कृति को अपनाया जाए। प्रशासनिक व्यवस्था लगातार बदल रही है और उसके अनुरूप प्रशिक्षण के तरीके भी आधुनिक होने चाहिए।
🌟 अनुभवों से मिलेगा बेहतर शासन का मार्ग
बैठक के दौरान अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों में कार्य करते समय मिले अनुभव, चुनौतियां और प्रशासनिक नवाचारों पर चर्चा की। इस तरह के संवाद से न केवल नीति निर्माण को नई दिशा मिलती है, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
🇮🇳 सुशासन को मिलेगा नया आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि मिड-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम अनुभवी अधिकारियों को नई नीतियों, तकनीकों और प्रशासनिक दृष्टिकोण से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनने में मदद मिलती है।
📌 निष्कर्ष
मसूरी स्थित LBSNAA में डॉ. जितेंद्र सिंह और अनुभवी IAS अधिकारियों के बीच हुआ यह संवाद प्रशासनिक प्रशिक्षण में नई सोच और सहभागिता का प्रतीक है। अनुभवों के आदान-प्रदान, खुली चर्चा और साझा सीख पर आधारित यह पहल भविष्य में भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सक्षम, उत्तरदायी तथा जनहितैषी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
