
फिरोजाबाद/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। फिरोजाबाद पुलिस ने अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय एक संगठित साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट, निवेश (इन्वेस्टमेंट) फ्रॉड और पेपर ट्रेडिंग जैसे साइबर अपराधों के जरिए लोगों को ठगकर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई कर रहा था।
🛑 तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। इनके कब्जे से 10 बैंक पासबुक, 5 चेकबुक, 8 एटीएम कार्ड, 2 सिम कार्ड और आधार कार्ड सहित कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही संबंधित बैंक खातों में मौजूद करीब 11 लाख रुपये की राशि होल्ड कराई गई है।
💰 करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का खुलासा
जांच में सामने आया कि आरोपी विभिन्न साइबर अपराधों से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित करते थे। अब तक की जांच में लगभग 70 लाख रुपये के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। वहीं, देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज करीब 12 शिकायतों में लगभग 8 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का उल्लेख सामने आया है।
🔍 जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों और बड़े साइबर नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
🛡️ साइबर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
उत्तर प्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। लोगों से अपील की गई है कि किसी भी अनजान कॉल, निवेश के लालच, डिजिटल अरेस्ट या संदिग्ध ऑनलाइन लिंक पर भरोसा न करें। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
फिरोजाबाद पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। संगठित साइबर गिरोह पर की गई इस कार्रवाई से न केवल करोड़ों रुपये की ठगी के नेटवर्क का खुलासा हुआ है, बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां तकनीकी अपराधों पर लगातार कड़ी नजर बनाए हुए हैं। आम नागरिकों की सतर्कता और पुलिस की सक्रिय कार्रवाई मिलकर ही साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकती है।
