
देवरिया/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत देवरिया में एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित रूप से साइबर ठगी से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से अवैध धनराशि की निकासी और हस्तांतरण में शामिल थे। मामले की जांच जारी है।
🔍 कार्रवाई में क्या बरामद हुआ?
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से निम्नलिखित सामग्री बरामद की—
- 08 मोबाइल फोन
- 04 एटीएम कार्ड
- 03 आधार कार्ड
- 04 बैंक पासबुक
- ₹13,620 नकद
पुलिस ने बरामद सामग्री को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है।
💻 ठगी का कथित तरीका
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी कथित रूप से साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से निकालते थे। इसके बाद रकम को अन्य खातों में स्थानांतरित कर नेटवर्क के संचालन में सहयोग करते थे। पुलिस के अनुसार, प्रत्येक बैंक खाते के उपयोग के बदले उन्हें लगभग ₹10,000 से ₹15,000 तक कमीशन मिलने की जानकारी सामने आई है। इन दावों की जांच जारी है।
📊 कई साइबर शिकायतों से जुड़ा मामला
पुलिस के अनुसार, संदिग्ध बैंक खातों से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और अन्य माध्यमों पर दर्ज 17 साइबर शिकायतों का भी परीक्षण किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का दायरा कितना व्यापक था और इसमें अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
🛡️ नागरिकों के लिए सावधानी जरूरी
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल, संदिग्ध लिंक, फर्जी निवेश योजना या ओटीपी साझा करने जैसे अनुरोधों से सतर्क रहें। यदि किसी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें तथा निकटतम पुलिस थाने को भी सूचना दें।
✨ निष्कर्ष
देवरिया पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के विरुद्ध कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सतर्कता को दर्शाती है। डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दौर में नागरिकों की जागरूकता और समय पर शिकायत दर्ज कराना भी साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
