
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जूट क्षेत्र के विकास और इससे जुड़े किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने कहा कि देश के वैज्ञानिक जूट की नई और उन्नत किस्मों के विकास पर लगातार कार्य कर रहे हैं, लेकिन इस दिशा में अभी और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जूट को “गोल्डन फाइबर” के रूप में जाना जाता है और यह न केवल किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए जूट उत्पादन, उसकी गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को और मजबूत किया जाएगा।
जूट क्षेत्र के विकास पर सरकार का फोकस
- जूट की अधिक उत्पादन क्षमता वाली नई किस्मों के विकास पर जोर दिया जाएगा।
- किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक जानकारी से जोड़ने के प्रयास तेज होंगे।
- जूट आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी।
- जूट उत्पादों के घरेलू और वैश्विक बाजार को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।
- पर्यावरण हितैषी उत्पादों के रूप में जूट की उपयोगिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
किसानों के जीवन स्तर में सुधार है प्राथमिकता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि जूट क्षेत्र से जुड़े किसानों, श्रमिकों और उद्योगों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसके लिए अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिकों के निरंतर प्रयास और सरकार की किसान-केंद्रित नीतियों के माध्यम से जूट क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों के लिए सुनहरा अवसर
जूट क्षेत्र में नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देकर भारत “गोल्डन फाइबर” की वैश्विक पहचान को और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जूट किसानों की समृद्धि और इस क्षेत्र के सतत विकास के लिए हर संभव प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
