
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश में पहली बार लगभग 28,000 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा न्यूक्लियर आइलैंड इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) टेंडर लाने की तैयारी की गई है। यह पहल न केवल परमाणु ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को स्वच्छ, सुरक्षित और दीर्घकालिक ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में भी नई गति देगी।
माही बांसवाड़ा परियोजना बनेगी आधार
यह विशाल EPC टेंडर माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) के लिए जारी किया जाएगा। इस परियोजना के तहत 700 मेगावाट क्षमता वाले चार स्वदेशी प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) स्थापित किए जाएंगे। इन चारों इकाइयों के चालू होने के बाद देश की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
ASHVINI करेगा परियोजना का संचालन
इस परियोजना का टेंडर अनुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (ASHVINI) जारी करेगा, जो न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और एनटीपीसी (NTPC) का संयुक्त उपक्रम है। इसका उद्देश्य भारत में बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण को तेज करना और निजी व सार्वजनिक उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना है।
EPC पैकेज में क्या-क्या शामिल होगा?
इस मेगा टेंडर के अंतर्गत परियोजना से जुड़े लगभग सभी प्रमुख कार्य शामिल किए गए हैं, जैसे—
- विस्तृत इंजीनियरिंग और डिजाइन
- आवश्यक उपकरणों एवं प्रणालियों की खरीद
- सिविल निर्माण कार्य
- मशीनों और प्रणालियों की स्थापना
- परीक्षण और गुणवत्ता सत्यापन
- कमीशनिंग एवं तकनीकी सहायता
इस व्यापक दायरे के कारण यह भारत के परमाणु क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा EPC अनुबंध माना जा रहा है।
भारतीय उद्योगों को मिलेगा बड़ा अवसर
इस परियोजना से घरेलू निर्माण कंपनियों, इंजीनियरिंग संस्थानों और उपकरण निर्माताओं को बड़े स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकी क्षमता का विस्तार होगा।
स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा बल
भारत लगातार जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाने पर काम कर रहा है। परमाणु ऊर्जा एक ऐसी तकनीक है जो बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के साथ कार्बन उत्सर्जन को सीमित रखने में मदद करती है। माही बांसवाड़ा परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
2047 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में भारत की स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 8.78 गीगावाट है। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में देश के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों ने 56,681 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया, जो इस क्षेत्र की लगातार बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
निष्कर्ष
भारत का यह मेगा परमाणु EPC टेंडर केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत आधार है। इससे स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा, उद्योगों को नए अवसर प्राप्त होंगे, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा और देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाएगा। आने वाले वर्षों में यह परियोजना भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को नई पहचान देने के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में भी अहम योगदान देगी।
