
भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर श्रमिक कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से प्रस्तुत किया है। BRICS देशों की श्रम एवं रोजगार मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत ने “Inclusive Growth through Decent Work” अर्थात सम्मानजनक कार्य के माध्यम से समावेशी विकास का अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए वैश्विक श्रम नीतियों को नई दिशा देने का संदेश दिया।
इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य BRICS देशों के बीच रोजगार सृजन, श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा तंत्र को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाना था। तेजी से बदलते वैश्विक श्रम बाजार, तकनीकी बदलावों और रोजगार की नई चुनौतियों के बीच श्रमिकों के हितों की रक्षा पर व्यापक चर्चा की गई।
भारत की ओर से केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने देश में श्रमिकों और युवाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कौशल विकास कार्यक्रमों, डिजिटल रोजगार प्लेटफॉर्म और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने लाखों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत का लक्ष्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि प्रत्येक श्रमिक को सम्मानजनक कार्य, सामाजिक सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करना भी है। भारत की विकास यात्रा में श्रमिकों को केंद्र में रखकर नीतियों का निर्माण किया जा रहा है, जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान करता है।
बैठक में BRICS समूह के सदस्य देशों—ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—ने श्रम बाजार से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया। सदस्य देशों ने कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक अधिकारों के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।
भारत ने इस वैश्विक मंच से स्पष्ट संदेश दिया कि आर्थिक विकास तभी सार्थक है, जब उसके केंद्र में श्रमिकों का कल्याण, सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित हों। समावेशी और टिकाऊ विकास केवल आर्थिक प्रगति का नाम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की सोच है।
BRICS देशों की यह बैठक वैश्विक स्तर पर रोजगार स्थिरता और श्रमिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। भारत की सक्रिय और सकारात्मक भागीदारी यह दर्शाती है कि देश न केवल अपनी घरेलू श्रम नीतियों को सशक्त बना रहा है, बल्कि विश्व समुदाय के सामने समावेशी विकास का एक प्रभावी मॉडल भी प्रस्तुत कर रहा है।
भारत का यह दृष्टिकोण आने वाले समय में वैश्विक श्रम नीतियों और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। श्रमिकों के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के साथ ही समावेशी विकास का सपना साकार होगा।
