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आर्थिक समीक्षा 2024-25: भारत की आर्थिक वृद्धि और भविष्य की संभावनाएँ

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2024-25 देश की आर्थिक स्थिति, विकास की संभावनाओं और चुनौतियों का एक व्यापक विश्लेषण प्रदान करती है। इस समीक्षा में विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन, नीतिगत प्राथमिकताओं और आगामी वित्तीय वर्षों में संभावित आर्थिक रुझानों का आकलन किया गया है।

भारत की जीडीपी वृद्धि दर और आर्थिक स्थिति

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो देश के पिछले दस वर्षों के औसत के काफी करीब है। अगले वित्त वर्ष (2026) में यह दर 6.3 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

इस समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2023 में वैश्विक अर्थव्यवस्था 3.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी, और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अगले पांच वर्षों के लिए 3.2 प्रतिशत की वैश्विक वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। वैश्विक अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के बावजूद, भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन बनाए रखा है।

वित्तीय क्षेत्र और निवेश

भारत में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में सकारात्मक वृद्धि देखी गई है। जुलाई-नवंबर 2024 के दौरान कैपेक्स में 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को बल मिला।

समीक्षा के अनुसार, सकल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) वर्ष 2025 के पहले आठ महीनों में 17.9 प्रतिशत बढ़ा, जो 47.2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 55.6 बिलियन डॉलर हो गया। यह भारत की बढ़ती निवेश क्षमता और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दिसंबर 2024 तक 640.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो 10.9 महीने के आयात को कवर करने और 90 प्रतिशत विदेशी ऋण चुकाने के लिए पर्याप्त है।

औद्योगिक और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन

औद्योगिक क्षेत्र

वित्त वर्ष 2025 में औद्योगिक क्षेत्र में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। पहली तिमाही में औद्योगिक विकास 8.3 प्रतिशत रहा, लेकिन वैश्विक मांग में गिरावट, मानसून के प्रभाव और त्योहारी सीजन में बदलाव के कारण दूसरी तिमाही में यह गति थोड़ी धीमी हो गई।

हालांकि, विनिर्माण गतिविधियों में सुधार जारी रहा, और दिसंबर 2024 में भारत के पीएमआई (Purchasing Managers’ Index) विनिर्माण क्षेत्र में तेजी का संकेत दे रहा है।

सेवा क्षेत्र

भारत का सेवा क्षेत्र लगातार मजबूत बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अप्रैल-नवंबर 2025 में सेवा निर्यात में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष के 5.7 प्रतिशत की तुलना में दोगुनी से अधिक है।

भारत का सेवा निर्यात क्षेत्र वैश्विक स्तर पर सातवां सबसे बड़ा है, जिससे देश को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिली है।

कृषि क्षेत्र की वृद्धि

कृषि क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025 में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 1647.05 लाख मीट्रिक टन (LMT) तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 89.37 LMT अधिक है।

कृषि क्षेत्र की वृद्धि के प्रमुख कारक:

पर्याप्त जल उपलब्धता और अनुकूल मौसम परिस्थितियों से कृषि उत्पादन में सकारात्मक रुझान बने हुए हैं।

मुद्रास्फीति और उपभोक्ता मूल्य वृद्धि

समीक्षा के अनुसार, दिसंबर 2024 तक खुदरा महंगाई (CPI) घटकर 4.9 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2026 में उपभोक्ता मूल्य महंगाई 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब रहने की संभावना है।

हालांकि, खाद्य मुद्रास्फीति 8.4 प्रतिशत तक रही, जिसमें सब्जियों और दालों की कीमतों का मुख्य योगदान रहा।

रोजगार और श्रम बाजार

भारत में बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। वर्ष 2017-18 में बेरोजगारी दर 6 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर श्रम क्षेत्र में एआई के नकारात्मक प्रभाव को कम करने और रोजगार सृजन के नए अवसर पैदा करने के लिए कदम उठाने होंगे।

MSME और स्टार्टअप्स को बढ़ावा

सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत कोष की शुरुआत की है, जिससे MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को इक्विटी वित्तपोषण उपलब्ध कराया जाएगा

इसके अलावा, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2.0 के तहत व्यापार नियमों को और सरल बनाया जाएगा, ताकि छोटे और मध्यम उद्यमों को तेजी से विकसित होने में सहायता मिले।

बुनियादी ढांचा और परिवहन क्षेत्र में विकास

भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी बनी हुई है।

आने वाले दशकों में अवसंरचना में सतत निवेश भारत की उच्च विकास दर बनाए रखने के लिए आवश्यक होगा।

सरकारी वित्त और कर राजस्व

हालांकि, केंद्र सरकार के राजस्व संग्रह में कोई उल्लेखनीय उछाल नहीं देखा गया।

निष्कर्ष: भारत का आर्थिक भविष्य

आर्थिक समीक्षा 2024-25 बताती है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है

वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीतिगत सुधार, नवाचार, डिजिटल परिवर्तन और बुनियादी ढांचे में सतत निवेश आवश्यक होंगे।

इस आर्थिक समीक्षा से स्पष्ट होता है कि भारत न केवल वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना रहेगा, बल्कि अगले कुछ दशकों में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है

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