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🚨 “साइबर ठगों का देशव्यापी नेटवर्क बेनकाब!” 18 राज्यों में ₹2.86 करोड़ की ठगी, अहमदाबाद पुलिस ने तीन आरोपियों को दबोचा

भारत में साइबर अपराध तेजी से संगठित रूप ले रहे हैं। इसी कड़ी में गुजरात के अहमदाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने करोड़ों रुपये की साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए देश के कई राज्यों में लोगों को निशाना बना रहा था। पुलिस की कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मामले से जुड़े कई अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है।

🔍 जांच की शुरुआत कैसे हुई?

मामले की जांच राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 182 शिकायतों के आधार पर शुरू की गई। शिकायतों में ऑनलाइन ठगी और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी सामने आने के बाद अहमदाबाद साइबर क्राइम टीम ने व्यापक जांच अभियान शुरू किया।

जांच के दौरान पुलिस ने 16 से अधिक राज्यों में फैले साइबर नेटवर्क की कड़ियों को खंगाला और 124 संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की। इसके बाद एक बड़े साइबर गिरोह का खुलासा हुआ, जिसकी गतिविधियां कई राज्यों में संचालित हो रही थीं।

🏢 फर्जी कंपनियों के नाम पर लोगों को बनाया शिकार

आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने और लोगों का विश्वास जीतने के लिए दो कंपनियों का इस्तेमाल किया—

इन कंपनियों के माध्यम से ऑनलाइन लेन-देन और बैंक खातों का संचालन किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इनका उपयोग कथित रूप से साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को इधर-उधर स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।

💰 करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह पर लगभग 2.86 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी करने का आरोप है। पीड़ित विभिन्न राज्यों से हैं, जिससे यह मामला एक संगठित और अंतरराज्यीय साइबर अपराध का उदाहरण बन गया है।

साइबर अपराधियों ने डिजिटल भुगतान प्रणाली का दुरुपयोग करते हुए धन को कई खातों में ट्रांसफर किया, जिससे जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया।

🏦 बैंक खातों और म्यूल अकाउंट का हुआ इस्तेमाल

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 12 बैंक खातों का इस्तेमाल किया था। इसके अलावा, लगभग 60 म्यूल अकाउंट किट भी बरामद या चिन्हित की गई हैं।

‘म्यूल अकाउंट’ ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त धन को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करके उसकी वास्तविक स्रोत और गंतव्य को छिपाने के लिए किया जाता है। संगठित साइबर गिरोह अक्सर इसी तकनीक का उपयोग करके जांच एजेंसियों को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं।

👮 पुलिस की कार्रवाई जारी

अहमदाबाद पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि यह नेटवर्क और भी व्यापक हो सकता है।

⚠️ साइबर ठगी से कैसे बचें?

✍️ निष्कर्ष

अहमदाबाद पुलिस की यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि साइबर अपराधी अब अत्याधुनिक तकनीकों और संगठित नेटवर्क का उपयोग करके लोगों को निशाना बना रहे हैं। फर्जी कंपनियां, म्यूल अकाउंट और बहु-स्तरीय बैंकिंग नेटवर्क का इस्तेमाल साइबर अपराध को और जटिल बना रहा है। ऐसे में डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना और साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बन गई है।

डिजिटल सुविधा के इस दौर में जागरूकता ही साइबर ठगी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।

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