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“जन-जन तक शिक्षा की रोशनी! ULLAS मिशन से साक्षर बन रहा भारत, ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की नई क्रांति”

भारत में शिक्षा को हर व्यक्ति तक पहुँचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व में चल रहा ULLAS (Understanding Lifelong Learning for All in Society) अभियान देश के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में साक्षरता की नई इबारत लिख रहा है। इस मिशन में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIETs) और छात्र-शिक्षक मिलकर समाज के उन लोगों तक शिक्षा पहुँचा रहे हैं, जो अब तक औपचारिक शिक्षा से वंचित रहे हैं।

📚 क्या है ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम?

ULLAS यानी “नव भारत साक्षरता कार्यक्रम” केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को साक्षर बनाना और उन्हें जीवनभर सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है। यह अभियान केवल पढ़ना-लिखना सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सामाजिक, आर्थिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।

🌟 DIETs निभा रहे हैं महत्वपूर्ण भूमिका

देशभर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIETs) इस अभियान की रीढ़ बनकर उभरे हैं। DIETs से जुड़े छात्र-शिक्षक गाँवों और जनजातीय इलाकों में जाकर लोगों को साक्षर बनाने का कार्य कर रहे हैं। शिक्षा अब केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सामुदायिक सेवा का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

🏞️ ओडिशा का केंदुझार बना प्रेरणा का केंद्र

ओडिशा के केंदुझार जिले ने इस अभियान के तहत एक मिसाल पेश की है। यहाँ छात्र-शिक्षक ग्रामीण और जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर साक्षरता अभियान को सफल बना रहे हैं। सामुदायिक सहभागिता और शिक्षक शिक्षा के इस संगम ने यह साबित कर दिया है कि यदि समाज और शिक्षा संस्थान साथ आएँ, तो “साक्षर भारत” का सपना जल्द ही साकार हो सकता है।

👩‍🏫 शिक्षा से बदल रही हैं ज़िंदगियाँ

🚀 जनभागीदारी से मजबूत होगा साक्षर भारत

ULLAS अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी है। जब शिक्षक, छात्र और समाज एक साथ मिलकर शिक्षा के लिए कार्य करते हैं, तो उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यह अभियान देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।

निष्कर्ष

“शिक्षा ही सशक्त भारत की सबसे मजबूत नींव है।” ULLAS – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम इसी विचार को साकार कर रहा है। ओडिशा के केंदुझार से शुरू हुई यह प्रेरणादायक कहानी आज पूरे देश को यह संदेश दे रही है कि यदि शिक्षा को जन-आंदोलन बनाया जाए, तो साक्षर और आत्मनिर्भर भारत का सपना दूर नहीं। ग्रामीण भारत में जल रही ज्ञान की यह मशाल आने वाले समय में देश के विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का सामर्थ्य रखती है।

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