HIT AND HOT NEWS

आदि महोत्सव 2025: जनजातीय विरासत और संस्कृति का भव्य उत्सव

Anoop singh

भारत की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और शिल्प कौशल को प्रदर्शित करने के लिए आदि महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है। यह भव्य आयोजन 16 से 24 फरवरी 2025 तक नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित होगा। इस प्रतिष्ठित महोत्सव का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु करेंगी।

महोत्सव का उद्देश्य और महत्व

इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (ट्राइफेड) इस उत्सव का आयोजन कर रहा है, जो देशभर के 600 से अधिक कारीगरों, 500 प्रदर्शनकारी कलाकारों और 25 आदिवासी खाद्य स्टॉलों को एक मंच प्रदान करेगा।

प्रमुख आकर्षण

महोत्सव का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुएल ओराम ने कहा कि यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल है। यह उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने और उनकी पारंपरिक कला को आधुनिक उपभोक्ताओं तक लाने का प्रयास है।

जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके ने कहा कि यह महोत्सव राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में आदिवासी कारीगरों के लिए नए अवसर खोलेगा और उनकी आजीविका को मजबूत करेगा।

ट्राइफेड की भूमिका

जनजातीय मामलों के सचिव श्री विभु नायर ने कहा कि ट्राइफेड इस महोत्सव को सफल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि तकनीकी नवाचार, रणनीतिक साझेदारियों और उन्नत विपणन अवसरों के साथ यह अब तक का सबसे प्रभावशाली आयोजन होगा।

ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक श्री आशीष चटर्जी ने सभी नागरिकों से इस महोत्सव में भाग लेने और भारत के स्वदेशी कारीगरों की कला और शिल्प कौशल को समर्थन देने की अपील की।

निष्कर्ष

आदि महोत्सव 2025 जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति का प्रतीक है। यह महोत्सव न केवल उनकी कला और संस्कृति को प्रदर्शित करता है, बल्कि उन्हें स्थायी आजीविका के नए अवसर भी प्रदान करता है। यह आयोजन सरकारी अधिकारियों, कॉर्पोरेट नेताओं और आम जनता को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे भारत के आदिवासी कारीगरों और उद्यमियों को व्यापक स्तर पर पहचान और सहयोग मिलेगा।

इस महोत्सव का हिस्सा बनें और भारत की जनजातीय विरासत का अनूठा अनुभव प्राप्त करें!

Exit mobile version