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अंतरराष्ट्रीय एस्पर्जर दिवस: NIEPID द्वारा पूरे भारत में जागरूकता और समावेशन को बढ़ावा देने की पहल

अंतरराष्ट्रीय एस्पर्जर दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय दिव्यांग सशक्तिकरण संस्थान (NIEPID) ने विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य एस्पर्जर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना और समावेशन को प्रोत्साहित करना था। देशभर में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय केंद्रों पर इन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

एस्पर्जर सिंड्रोम को लेकर जागरूकता बढ़ाने की पहल

इस अभियान के तहत देश के विभिन्न संस्थानों और केंद्रों में विशेषज्ञों द्वारा वेबिनार, कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से एस्पर्जर सिंड्रोम को बेहतर ढंग से समझने, इससे जुड़ी चुनौतियों और सहायता रणनीतियों पर चर्चा की गई।

राष्ट्रीय अंग विकलांग संस्थान (NILD), कोलकाता ने “एस्पर्जर सिंड्रोम को समझना: अंतर्दृष्टि, चुनौतियां और सहायता रणनीतियां” विषय पर वेबिनार आयोजित किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने इस स्थिति से ग्रसित व्यक्तियों की जीवन गुणवत्ता को सुधारने के तरीकों पर चर्चा की।

जम्मू के समग्र क्षेत्रीय केंद्र (CRC) ने जम्मू कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें छात्रों और शिक्षकों को एस्पर्जर सिंड्रोम के लक्षणों और समावेशन के महत्व के बारे में शिक्षित किया गया।

नागपुर स्थित समग्र क्षेत्रीय केंद्र (CRC) ने “एस्पर्जर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों को समझना और समर्थन देना” विषय पर वेबिनार आयोजित किया। इसमें मुंबई की प्रारंभिक हस्तक्षेप विशेषज्ञ डॉ. श्रुति धेंगरे गायकवाड़ ने पुनर्वास तकनीकों और व्यावसायिक चिकित्सा की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

गुवाहाटी के समग्र क्षेत्रीय केंद्र (CRC) ने एस्पर्जर सिंड्रोम पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया, जिससे प्रतिभागियों को दृश्य और शैक्षिक दृष्टि से इस स्थिति को समझने में मदद मिली।

जयपुर स्थित समग्र क्षेत्रीय केंद्र (CRC) ने एक आभासी वेबिनार आयोजित किया, जिसमें एस्पर्जर सिंड्रोम से जुड़ी चुनौतियों और प्रभावी सहायता रणनीतियों पर चर्चा की गई।

समावेशन और जागरूकता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता

इन पहलों के माध्यम से NIEPID ने एस्पर्जर सिंड्रोम से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने और समावेशन को प्रोत्साहित करने के अपने संकल्प को सुदृढ़ किया। विशेषज्ञों द्वारा संचालित चर्चाओं और शैक्षिक कार्यक्रमों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे भारत में एक अधिक सहायक और समझदार समाज बनाने की दिशा में प्रगति हो सके।

यह आयोजन एस्पर्जर सिंड्रोम के बारे में जागरूकता फैलाने, उपचार और पुनर्वास की रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करने और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक समावेशी वातावरण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सामाजिक समावेशन और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में NIEPID की यह पहल सराहनीय है।

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