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भारत-यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी को प्रधानमंत्री मोदी ने बताया “स्वाभाविक और जैविक”

सांकेतिक तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी की सराहना करते हुए इसे “स्वाभाविक और जैविक” करार दिया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) इस वर्ष के अंत तक संभव हो सकता है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर जोर

हैदराबाद हाउस में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन के साथ अपनी बैठक के बाद एक संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमने विभिन्न मुद्दों पर गहन और सार्थक चर्चा की। हमने अपनी टीमों को निर्देश दिया है कि वे एक पारस्परिक लाभकारी मुक्त व्यापार समझौते पर कार्य करें और इसे इस वर्ष के अंत तक साकार करें।”

प्रधानमंत्री ने इस बैठक को दोनों पक्षों के संबंधों में एक नया अध्याय बताया और कहा कि कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिससे भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी को और अधिक गति मिलेगी।

यूरोपीय आयोग के ऐतिहासिक दौरे का स्वागत

प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय आयोग के इस दौरे को अभूतपूर्व करार देते हुए कहा कि यह न केवल यूरोपीय आयोग का भारत में पहला दौरा है, बल्कि किसी भी देश के साथ इस स्तर की व्यापक भागीदारी का यह पहला अवसर भी है।

उन्होंने कहा, “यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष और उनके प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा ऐतिहासिक है। यह न केवल आयोग का भारत में पहला दौरा है, बल्कि किसी भी एक देश के साथ इस तरह की व्यापक चर्चा का भी यह पहला अवसर है। मैं पूरे आयोग का भारत में स्वागत करता हूं।”

भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में नए आयाम

भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल क्षेत्र और हरित ऊर्जा जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को कवर करती है। भारत और यूरोपीय संघ लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता इस दिशा में एक बड़ा कदम होगा, जिससे दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बैठक को भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला करार दिया और कहा कि दोनों पक्ष इस साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आगामी महीनों में, दोनों पक्ष इस मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे, जिससे भारत और यूरोपीय संघ के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

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