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भोपाल सहकारी सम्मेलन: मध्यप्रदेश के ग्रामीण विकास में सहकारिता की नई क्रांति

Anoop singh

भोपाल, 13 अप्रैल 2025 — केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए सहकारिता क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग और केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी सहित कई विशिष्ट जन उपस्थित थे।

सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और उसका प्रभाव

श्री अमित शाह ने बताया कि आज़ादी के 75 वर्षों बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम रहा। उन्होंने कहा कि सहकारिता अब केवल एक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार बन रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार सहकारिता राज्यों का विषय है, फिर भी केंद्र सरकार ने इसे मजबूती देने के लिए व्यापक प्रयास किए हैं।

PACS का सशक्तिकरण और डिजिटल क्रांति

सम्मेलन में बताया गया कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को अब केवल ऋण वितरक संस्था न मानते हुए बहुउद्देश्यीय सेवाओं का केंद्र बनाया जा रहा है। PACS अब जन औषधि केंद्र, जल वितरण सेवा, कॉमन सर्विस सेंटर, रेल टिकट, बिजली बिल भुगतान, और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी 300 से अधिक सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा, उन्हें उर्वरक डीलर, पेट्रोल पंप संचालक और रसोई गैस वितरक बनने की अनुमति भी दी गई है।

श्री शाह ने कहा कि भारत सरकार ने पूरे देश में PACS के कंप्यूटराइजेशन पर 2500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है। अब PACS किसान की भाषा में – जैसे हिंदी, गुजराती, बंगाली आदि – सेवाएं दे रही हैं।

सहकारी डेयरी विकास की नई दिशा

कार्यक्रम का विशेष फोकस सहकारी डेयरी विकास पर था। श्री शाह ने बताया कि NDDB और MPCDF के बीच हुए अनुबंध से मध्य प्रदेश के हर गांव तक सहकारी डेयरी का विस्तार होगा। वर्तमान में राज्य में केवल 1% दूध ही सहकारी डेयरियों के माध्यम से आता है। इस अनुबंध से यह प्रतिशत बढ़ाने और दूध से मूल्य वर्धित उत्पाद (पनीर, दही, मठा) बनाकर किसानों को अधिक लाभ दिलाने का लक्ष्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले पाँच वर्षों में 50% गांवों में प्राथमिक दुग्ध उत्पादक समितियों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है, जिससे मिल्क प्रोसेसिंग क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी।

तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की स्थापना

कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए मोदी सरकार ने तीन मल्टीस्टेट सहकारी संस्थाओं –

  1. राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL)
  2. राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड (NCOL)
  3. भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL)
    की स्थापना की है। ये संस्थाएं किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने, जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने और बीज उत्पादन में छोटे किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही हैं।

त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना

श्री शाह ने सहकारिता क्षेत्र में मानव संसाधन निर्माण के लिए ‘त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय’ की स्थापना की भी जानकारी दी, जहां से अकाउंटेंट, डेयरी इंजीनियर, पशु चिकित्सक और कृषि वैज्ञानिक जैसे सहकारिता-आधारित प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स निकलेंगे।

निष्कर्ष: स्वर्णिम अवसर का आह्वान

श्री शाह ने सम्मेलन के अंत में कहा कि विपक्षी सरकारों के समय उपेक्षित सहकारी क्षेत्र को पुनर्जीवित करने का यह स्वर्णिम अवसर है। अब मध्यप्रदेश में सुशासन है और सहकारिता के माध्यम से गांव-गांव तक समृद्धि पहुँचाई जा सकती है। उन्होंने यह भी दोहराया कि मोदी सरकार राज्य सरकार के साथ मिलकर किसानों के हित में हर संभव कदम उठाने को कटिबद्ध है।


यह सम्मेलन न केवल सहकारिता आंदोलन को पुनर्जीवित करने का संकेत है, बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी है।

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