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सर्जियो रामेली की 50वीं पुण्यतिथि – जॉर्जिया मेलोनी का संदेश

29 अप्रैल 2025 को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक विशेष अवसर पर सर्जियो रामेली की 50वीं पुण्यतिथि को याद किया। सर्जियो रामेली, जिनकी मृत्यु 1975 में हुई थी, एक इतालवी छात्र और कार्यकर्ता थे, जिन्हें राजनीतिक हिंसा का शिकार बनना पड़ा था। इस अवसर पर मेलोनी ने एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने रामेली के बलिदान को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।

जॉर्जिया मेलोनी, जो इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं, ने अपने संदेश में कहा कि सर्जियो रामेली की यादें आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @GiorgiaMeloni पर यह पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “29 अप्रैल को सर्जियो रामेली की मृत्यु के 50 साल पूरे हो रहे हैं। उनके स्मरण में मेरा यह वीडियो संदेश।” इस पोस्ट को 28 अप्रैल 2025 को रात 11:11 बजे प्रकाशित किया गया था, और इसे अब तक 116K से अधिक बार देखा जा चुका है। पोस्ट को 602 रीपोस्ट, 65 कोट्स, 4,638 लाइक्स और 85 बुकमार्क्स मिले हैं, जो दर्शाता है कि यह संदेश लोगों के बीच काफी चर्चा में रहा।

सर्जियो रामेली की कहानी 1970 के दशक के इटली की राजनीतिक अशांति की एक दुखद मिसाल है। उस समय इटली में दक्षिणपंथी और वामपंथी समूहों के बीच तनाव चरम पर था, जिसे “लीड के साल” (Years of Lead) के नाम से जाना जाता है। रामेली, जो एक युवा दक्षिणपंथी कार्यकर्ता थे, पर वामपंथी चरमपंथियों ने हमला किया था, जिसके बाद वह कोमा में चले गए और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु ने उस समय के राजनीतिक हिंसा के खतरों को उजागर किया और इटली में एक गहरी छाप छोड़ी।

जॉर्जिया मेलोनी ने अपने वीडियो संदेश में इस बात पर जोर दिया कि सर्जियो रामेली की मृत्यु हमें यह सिखाती है कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अतीत से सीख लेकर एक बेहतर और शांतिपूर्ण समाज की दिशा में काम करना चाहिए। मेलोनी ने यह भी कहा कि रामेली जैसे लोगों की कुर्बानी को कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह हमें हमारे इतिहास और उसकी जटिलताओं की याद दिलाती है।

यह संदेश न केवल सर्जियो रामेली की स्मृति को सम्मानित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जॉर्जिया मेलोनी अपने देश के इतिहास के प्रति कितनी संवेदनशील हैं। उनके इस कदम की सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना हुई है, और कई लोगों ने इसे एक साहसी और भावनात्मक पहल बताया है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि इतिहास के दुखद पन्नों से हम क्या सबक ले सकते हैं और कैसे एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

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