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आईएनएस शारदा की मालदीव यात्रा: भारत-मालदीव के सामुदायिक और सामरिक संबंधों को नया आयाम

Anoop singh

भारत और मालदीव के बीच सहयोग और समन्वय का एक नया अध्याय उस समय जुड़ा जब भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस शारदा 4 मई 2025 को मालदीव के माफीलाफुशी एटोल पहुंचा। यह यात्रा किसी साधारण दौरे से कहीं अधिक है। यह मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभ्यास के तहत हो रही है, जिसका आयोजन 4 से 10 मई 2025 तक किया जा रहा है।

इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नौसेना और मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (MNDF) के बीच संचालनिक तालमेल और साझा प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है। इसका लाभ न केवल दोनों देशों की रक्षा क्षमताओं को होगा, बल्कि यह मानवीय संकटों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

भारत का ‘सागर’ दृष्टिकोण

आईएनएस शारदा की यह तैनाती भारत के ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस नीति का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है। भारत क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग और सहायता के माध्यम से साझा सुरक्षा की अवधारणा को मजबूती प्रदान कर रहा है।

अभ्यास की मुख्य गतिविधियाँ

इस एचएडीआर अभ्यास के दौरान विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी:

इन गतिविधियों का उद्देश्य न केवल आपदा के समय बेहतर प्रतिक्रिया देना है, बल्कि दोनों देशों के सैन्यबलों को एक-दूसरे की कार्यशैली, तकनीकों और प्रणालियों को समझने का अवसर भी देना है।

भारत-मालदीव संबंधों में नया उत्साह

भारत और मालदीव के बीच रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग चला आ रहा है। आईएनएस शारदा की यह तैनाती इस सहयोग को और भी गहरा और व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। यह स्पष्ट करता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी, समर्थन और स्थायित्व के मूल्यों को लेकर प्रतिबद्ध है।

निष्कर्ष

आईएनएस शारदा की मालदीव यात्रा और एचएडीआर अभ्यास यह दर्शाते हैं कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ न केवल रणनीतिक संबंधों को महत्व देता है, बल्कि संकट की घड़ी में कंधे से कंधा मिलाकर चलने की नीति भी अपनाता है। यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी होगी, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग की भावना को मजबूती देगी।

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