HIT AND HOT NEWS

यहाँ आपके लिए 100% यूनिक और सटीक हिंदी लेख प्रस्तुत है:


Anoop singh

सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों की सुरक्षा और कृषि संसाधनों की समीक्षाकिसानों की सुरक्षा और कृषि संसाधनों की समीक्षा में जुटे

भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे किसानों की समस्याओं और उनके कृषि संसाधनों की उपलब्धता पर केंद्र सरकार ने गंभीरता से ध्यान केंद्रित किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 10 मई 2025 को एक अहम समीक्षा बैठक की, जिसमें गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के सीमावर्ती जिलों के किसानों की स्थिति पर चर्चा की गई।

श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि सीमा पर जहां एक ओर हमारे जवान देश की सुरक्षा में तैनात हैं, वहीं किसान भी अपने खेतों में पूरी निष्ठा से देश की सेवा में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसान की चिंता करना हमारी ड्यूटी है और ऐसे में उनकी कृषि से जुड़ी हर आवश्यकता को समय पर पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

कृषि इनपुट्स की सुनिश्चित आपूर्ति पर बल

बैठक में खाद-बीज, यूरिया, डीएपी, एनपीके जैसे जरूरी कृषि इनपुट्स और डीजल की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीफ की फसल के लिए अभी से किसानों की आवश्यकताओं का आकलन कर लिया जाए ताकि समय रहते सभी संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

सीमावर्ती क्षेत्रों की जमीनी हकीकत की पड़ताल

श्री चौहान ने आदेश दिया कि सीमा से लगे 10–15 किलोमीटर क्षेत्र में आने वाले गांवों की सूची तैयार की जाए, और वहाँ उपलब्ध खेती योग्य भूमि, बोई जाने वाली फसलों, किसानों की संख्या और उनकी वर्तमान समस्याओं का समग्र आकलन किया जाए। जिन किसानों की सुरक्षा कारणों से खेतों तक पहुंच नहीं है, उनके लिए राज्य सरकारों के सहयोग से विशेष सहायता योजनाएं बनाई जाएंगी।

राज्य सरकारों से समन्वय और कार्य योजना

बैठक में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों के लिए समन्वित कार्य योजना तैयार करें। इसके लिए संबंधित मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों और कृषि विभाग के अधिकारियों से संवाद स्थापित किया जा रहा है।

भविष्य की दिशा

श्री चौहान ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उन किसानों का मनोबल बनाए रखना है, जो सीमावर्ती इलाकों में रहकर राष्ट्र सेवा में जुटे हैं। यह समय देश की सेवा के लिए पूरी तरह से कमर कसकर काम करने का है, और इसमें किसान की भूमिका केंद्रीय है।


निष्कर्ष:
यह बैठक किसानों की समस्याओं के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों की सुरक्षा और आजीविका सुनिश्चित होगी, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन में भी निरंतरता बनी रहेगी।

क्या आप इस लेख का संक्षिप्त संस्करण या समाचार शैली में रूपांतरण चाहते हैं?

Exit mobile version