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यहाँ “खेलो इंडिया बीच गेम्स 2025” पर आधारित एक 100% मौलिक और विशिष्ट हिंदी लेख प्रस्तुत है:

Anoop singh

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           खेलों के नए युग की ओर:
          खेलो इंडिया बीच गेम्स 2025 का भव्य समापन
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भारत सरकार की खेलो इंडिया पहल के अंतर्गत पहली बार आयोजित किए गए “खेलो इंडिया बीच गेम्स 2025” ने देश में तटीय खेलों की एक नई परंपरा की शुरुआत कर दी है। यह ऐतिहासिक आयोजन 19 मई से 24 मई तक दीव, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव (DNHDD) में सम्पन्न हुआ, जिसने न केवल खेल प्रतिभाओं को एक नया मंच प्रदान किया बल्कि भारत के तटीय इलाकों में खेल संस्कृति को मजबूती देने का संदेश भी दिया।

⚫  सफल आयोजन और सराहना

खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने दीव में हुए इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि “यह आयोजन हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के उस विजन का प्रतीक है, जिसमें दीव को बीच गेम्स का केंद्र बनाने की कल्पना की गई थी।” उन्होंने मेज़बान केंद्र शासित प्रदेश DNHDD को धन्यवाद देते हुए मणिपुर, महाराष्ट्र और नागालैंड जैसे राज्यों को उनकी उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के लिए बधाई दी।

खासकर मणिपुर को पेंचक सिलाट में अद्वितीय साहस और कौशल दिखाने के लिए प्रथम स्थान मिला, जबकि नागालैंड ने पहली बार टॉप-3 में जगह बनाकर सबको चौंका दिया।

⚫  प्रतियोगिता की व्यापकता

इस आयोजन में कुल 811 एथलीटों ने भाग लिया, जिन्होंने छह मुख्य खेलों –

  1. पेंचक सिलाट
  2. सेपक टकरॉ
  3. बीच सॉकर
  4. बीच वॉलीबॉल
  5. ओपन वॉटर स्विमिंग
  6. बीच कबड्डी

में पदक के लिए मुकाबला किया। इसके अलावा दो प्रदर्शन खेल – मल्लखंभ और रस्साकशी भी आयोजन में शामिल थे, जिनका उद्देश्य पारंपरिक भारतीय खेलों को भी बढ़ावा देना था।

कुल मिलाकर 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लिया और 46 स्वर्ण पदकों के लिए संघर्ष किया।

⚫  खेल मंत्री और राज्य मंत्री की टिप्पणी

डॉ. मांडविया ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि “खेलों में कोई हारता नहीं है – या तो आप जीतते हैं या सीखते हैं।” यह विचार खेल भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को मजबूती देता है।

खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने समापन समारोह की मुख्य अतिथि के रूप में कहा, “खेलो इंडिया बीच गेम्स ने एक नए युग की शुरुआत की है और यह पूर्वोत्तर भारत की खेल प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम साबित हुआ है।”

उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार पूर्वोत्तर राज्यों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें उचित मंच और समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मणिपुर, नागालैंड और असम जैसे राज्यों के शानदार प्रदर्शन से यह बात साबित होती है।

⚫  निष्कर्ष:
खेलो इंडिया बीच गेम्स 2025 न केवल एक खेल प्रतियोगिता रहा, बल्कि यह भारत में समुद्री और तटीय खेलों के विकास की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। इस आयोजन ने युवाओं को खेलों के ज़रिए एकता, प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय गौरव की भावना से जोड़ा है।

ऐसी पहलों से यह स्पष्ट है कि भारत की खेल संस्कृति अब सिर्फ पारंपरिक मैदानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह समुद्र की लहरों तक पहुंच रही है – पूरे जोश और जुनून के साथ।

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