
संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, 25 मई – एक ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे सांसद डॉ. शशि थरूर ने अमेरिका में एक अंतरराष्ट्रीय संदेश दिया कि भारत अब आतंकी हमलों के विरुद्ध मूकदर्शक नहीं रहेगा। उन्होंने दुनिया को यह स्पष्ट किया कि भारत अब सक्रिय भूमिका में आकर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूती देगा।
यह वक्तव्य उन्होंने उस समय दिया जब प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क में स्थित 9/11 हमले के स्मारक स्थल का दौरा कर रहा था। उन्होंने कहा कि यह स्थल केवल अमेरिका की पीड़ा का प्रतीक नहीं है, बल्कि वह हर उस देश के लिए चेतावनी है जो आतंक की विभीषिका झेल चुका है या झेल सकता है।
आतंकवाद से पीड़ित राष्ट्रों की साझी वेदना
डॉ. थरूर ने कहा कि भारत ने भी लंबे समय से आतंकवाद का दर्द सहा है, और अब समय आ गया है कि इस खतरे से निपटने के लिए वैश्विक साझेदारी और सहयोग को बढ़ाया जाए। उनका कहना था कि आतंक की पीड़ा केवल एक सीमा तक सीमित नहीं है; यह एक वैश्विक चुनौती है, और इसे सामूहिक प्रयास से ही रोका जा सकता है।
अन्य देशों में भी जाएगी भारत की आवाज़
इस प्रतिनिधिमंडल की योजना अमेरिका के अतिरिक्त गयाना, पनामा, ब्राज़ील और कोलंबिया जैसे देशों का दौरा करने की भी है। इस यात्रा के दौरान भारत उन देशों के नागरिकों और नेताओं को यह समझाने का प्रयास करेगा कि आतंकवाद से मुकाबला करना सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों का नहीं, बल्कि पूरी मानवता की जिम्मेदारी है।
भारत का नया दृष्टिकोण
थरूर ने कहा कि अब भारत केवल पीड़ित बनकर नहीं रहेगा, बल्कि वह एक जागरूक, सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाएगा। भारत अब दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि आतंक के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सैनिक बल से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समर्थन, जनजागरूकता और साझा रणनीति से जीती जा सकती है।