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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा आयोजित ऑनलाइन शॉर्ट-टर्म इंटर्नशिप का सफल समापन: एक नया दृष्टिकोण और संवेदनशीलता की ओर कदम

Anoop singh

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने 13 मई 2025 से प्रारंभ की गई दो सप्ताह की ऑनलाइन शॉर्ट-टर्म इंटर्नशिप का सफल समापन किया है। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों से चयनित 69 विद्यार्थियों ने भाग लिया। यह इंटर्नशिप मानवाधिकारों की गहरी समझ विकसित करने और युवाओं में संवेदनशीलता तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त माध्यम साबित हुई।

इस कार्यक्रम के लिए कुल 1,795 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 80 विद्यार्थियों का चयन हुआ और 69 ने इसे पूर्ण किया। यह चयन प्रक्रिया आयोग की गुणवत्ता और मानदंडों की गंभीरता को दर्शाती है। इंटर्नशिप के समापन सत्र में एनएचआरसी की सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और उन्हें उनके प्रयासों के लिए बधाई दी।

अपने संबोधन में श्रीमती सयानी ने मानवाधिकारों को केवल एक वैचारिक अवधारणा नहीं, बल्कि एक जीवंत और आवश्यक सामाजिक वास्तविकता के रूप में देखने का आह्वान किया। उन्होंने छात्रों से सहानुभूति को जीवन का मूल सिद्धांत बनाने की अपील की, जिससे न्याय, समानता और सम्मान की भावना को मजबूती मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हमें समाज में व्याप्त असमानता और भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए।

श्रीमती सयानी ने आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले की जनजातीय आबादी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे पोलावरम परियोजना के कारण विस्थापित हुए लोगों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शीघ्र समाधान की अपील करते हुए यह दोहराया कि मानवाधिकार केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों में दिखने चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान आयोग के संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार ने इंटर्नशिप रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि 35 सत्रों के माध्यम से छात्रों को मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। इन सत्रों में एनएचआरसी के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। छात्रों को दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल, पुलिस स्टेशन और आशा किरण आश्रय गृह का वर्चुअल दौरा भी कराया गया ताकि वे मानवाधिकारों की रक्षा में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को समझ सकें।

कार्यक्रम के अंत में छात्रों की शैक्षणिक और रचनात्मक क्षमताओं को प्रोत्साहित करने के लिए पुस्तक समीक्षा, समूह परियोजना प्रस्तुति और भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गईं। विजेताओं की घोषणा समापन समारोह में की गई।

यह इंटर्नशिप न केवल छात्रों के लिए एक सीखने का अवसर था, बल्कि यह उन्हें मानवाधिकारों के प्रति अधिक सजग, संवेदनशील और सक्रिय नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करने वाली पहल भी साबित हुई। आयोग की यह पहल भविष्य के नीति निर्माताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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