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झज्जर में पत्रकार की हत्या पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती: अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला

Anoop singh

नई दिल्ली, 27 मई 2025 – हरियाणा के झज्जर जिले के लुहारी गांव में पत्रकार की नृशंस हत्या ने पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ा दी है। 18 मई की रात अज्ञात हमलावरों द्वारा एक स्थानीय पत्रकार को उनके घर के पास गोली मार दी गई, जिससे बाद में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस गंभीर घटना का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः पहल की है और हरियाणा पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, मृतक पत्रकार एक डिजिटल न्यूज़ पोर्टल से जुड़े थे और अक्सर सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते थे। घटना वाली रात वे रोज़ की तरह टहलने निकले थे, तभी अंधेरे में घात लगाए बैठे हमलावरों ने उन पर गोलीबारी की। स्थानीय लोगों की तत्परता से उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उनका जीवन नहीं बचाया जा सका।

एनएचआरसी की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसे ना केवल एक हत्या, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है। आयोग ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से भी जुड़ी हुई है। आयोग ने हरियाणा सरकार से जांच की स्थिति, आरोपी की पहचान, अब तक की गई कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मिली सहायता का पूरा विवरण मांगा है।

पत्रकार समुदाय में रोष
इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि जब एक पत्रकार अपने ही घर के पास सुरक्षित नहीं है, तो यह पूरी पत्रकारिता बिरादरी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। कई संगठनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग भी की है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कड़ी सज़ा मिले।

लोकतंत्र की नींव पर चोट
पत्रकार किसी भी लोकतंत्र की आंख और ज़ुबान होते हैं। उन पर हमला करना, केवल एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि लोकतंत्र के बुनियादी ढांचे पर हमला करना है। यदि ऐसे अपराधियों को समय पर न्याय के दायरे में नहीं लाया गया, तो यह न केवल पत्रकारों में भय पैदा करेगा, बल्कि समाज में भी असुरक्षा की भावना गहराएगी।

निष्कर्ष
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पहल सराहनीय है। यह आवश्यक है कि मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तेज़ी से हो। पत्रकारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। उम्मीद की जा रही है कि यह मामला एक मिसाल बनेगा और न्याय प्रक्रिया पीड़ित परिवार को सम्मान के साथ इंसाफ दिलाएगी।

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