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कोलकाता में नई फॉरेंसिक साइंस लैब का उद्घाटन: भारत के आपराधिक न्याय तंत्र में नया युग

Anoop singh

1 जून 2025 को केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (CFSL) के नवीन भवन का उद्घाटन किया। यह लैब 88 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित की गई है और इसका उद्देश्य भारत के आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक एविडेंस-बेस्ड (साक्ष्य-आधारित) और तकनीकी रूप से उन्नत बनाना है।

भारत सरकार का दृष्टिकोण: न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

श्री शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार एक सुरक्षित, पारदर्शी और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित न्याय प्रणाली की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि इस लैब से न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि झारखंड, बिहार, ओडिशा, असम, सिक्किम और समस्त पूर्वोत्तर राज्यों को भी लाभ मिलेगा।

नई CFSL लैब अपराधों की जांच को वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित बनाने में सहायक होगी, जिससे न केवल दोषियों को सजा दिलाना आसान होगा बल्कि निर्दोषों को भी न्याय मिल सकेगा।

नई आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक साइंस की महत्वपूर्ण भूमिका

गृह मंत्री ने बताया कि भारत में लागू हो रहे तीन नए आपराधिक कानूनों — भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम — में फॉरेंसिक साइंस को कानूनी आधार दिया गया है। अब सात वर्ष से अधिक सजा वाले मामलों में क्राइम सीन पर फॉरेंसिक टीम की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही, आरोपपत्र दाखिल करने की समय-सीमा को 60 दिन में सुनिश्चित किया गया है, जिससे वर्तमान में लगभग 60% मामलों में यह समयसीमा पूरी की जा रही है।

एफएसएल नेटवर्क और क्लस्टर मॉडल की परिकल्पना

सरकार पूरे देश में FSL नेटवर्क विकसित कर रही है। क्लस्टर मॉडल के माध्यम से 3-4 राज्यों के समूह बनाकर फॉरेंसिक संसाधनों को साझा किया जाएगा। इससे हर जिले में मोबाइल फॉरेंसिक वैन और हर थाने तक फॉरेंसिक विज्ञान की पहुंच सुनिश्चित होगी। जनवरी 2026 से थानों, अभियोजन पक्ष और अदालतों में जागरूकता एवं प्रशिक्षण अभियान भी शुरू किया जाएगा।

तकनीक और प्रशिक्षण: भविष्य की तैयारी

श्री शाह ने बताया कि देश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) के 16 परिसरों को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 7 कार्यरत हैं। 9 और NFSU कैंपस 1300 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, 860 करोड़ रुपये की लागत से सात नई CFSL प्रयोगशालाएं उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल और बिहार में स्थापित की जाएंगी।

सरकार का लक्ष्य प्रतिवर्ष 30,000 फॉरेंसिक ट्रेंड प्रोफेशनल तैयार करना है, ताकि देश की न्यायिक व्यवस्था को आवश्यक मानव संसाधन मिल सके।

फॉरेंसिक ऑडिट और साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग का नया युग

फॉरेंसिक साइंस के उपयोग से आज आर्थिक घोटालों का पर्दाफाश हो रहा है और वर्षों पुराने केसों में भी दोषियों को सजा मिल रही है। मोबाइल फॉरेंसिक, कॉल डिटेल एनालिसिस, और साइकोलॉजिकल प्रोफाइलिंग जैसे आधुनिक उपकरणों से न्याय प्रणाली को नई दिशा मिल रही है।

निष्कर्ष

भारत सरकार का यह कदम न केवल न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक बनाने में सहायक है, बल्कि देश के नागरिकों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी सशक्त बनाता है। कोलकाता की यह नई लैब भारत में साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।


लेखक: प्रेस सूचना ब्यूरो, नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के आधार पर
तारीख: 01 जून 2025

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