
हाल ही में श्री मसातो कांडा के साथ हुई बैठक अत्यंत विचारोत्तेजक और उपयोगी रही। इस बातचीत में हमने न केवल वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा की, बल्कि भारत में बीते एक दशक के दौरान हुए तेज़ सामाजिक, तकनीकी और आर्थिक परिवर्तनों पर भी गहन विचार-विमर्श किया।
श्री कांडा, जो जापान के एक वरिष्ठ आर्थिक नीति निर्माता हैं, वैश्विक वित्तीय नीतियों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में गहरा अनुभव रखते हैं। उनके साथ संवाद करते हुए यह स्पष्ट हुआ कि भारत की नई भूमिका वैश्विक मंच पर लगातार मज़बूत हो रही है।
भारत में परिवर्तन की रफ्तार
पिछले दस वर्षों में भारत ने जिस तेज़ी से डिजिटल क्रांति को अपनाया है, वह अभूतपूर्व है। डिजिटल भुगतान, आधार प्रणाली, स्टार्टअप संस्कृति, और युवाओं में बढ़ती नवाचार की भावना ने देश को एक नई दिशा में अग्रसर किया है। ग्रामीण क्षेत्रों तक इंटरनेट की पहुँच, सरकारी योजनाओं का डिजिटल क्रियान्वयन और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
वैश्विक सहयोग की नई दिशा
श्री कांडा के साथ विचार साझा करते समय यह बात प्रमुखता से सामने आई कि भारत और जापान जैसे देश यदि मिलकर कार्य करें तो न केवल एशिया में, बल्कि पूरी दुनिया में स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा दिया जा सकता है। जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति एक साथ मिलकर नई संभावनाएं उत्पन्न कर सकती हैं।
निष्कर्ष
यह बैठक केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं थी, बल्कि यह दो देशों के बीच आपसी विश्वास, सहयोग और भविष्य के साझा दृष्टिकोण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम थी। श्री मसातो कांडा जैसे वैश्विक नेताओं के साथ संवाद न केवल दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है, बल्कि यह हमें प्रेरित करता है कि हम भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में और अधिक सशक्त बनाएँ।
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