
प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्वीकार किया है कि देश की महिलाओं ने एक ऐसा दौर देखा है जब उन्हें हर कदम पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक दबावों के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। यही महिलाएं आज शिक्षा, व्यवसाय, विज्ञान, रक्षा और राजनीति जैसे क्षेत्रों में न सिर्फ सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
पिछले 11 वर्षों में महिलाओं की उपलब्धियाँ
बीते 11 वर्षों में भारत में महिला सशक्तिकरण को लेकर अनेक प्रयास हुए हैं, जिनके परिणामस्वरूप देश की नारी शक्ति ने वैश्विक मंचों पर भी भारत का नाम रोशन किया है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘उज्ज्वला योजना’, ‘जन धन योजना’, और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी योजनाओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई है। गांवों की महिलाएं अब छोटे-मोटे व्यवसाय से लेकर डिजिटल दुनिया तक में कदम रख चुकी हैं।
सामाजिक सोच में बदलाव
यह बदलाव केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि समाज की सोच में हुए परिवर्तन का भी प्रतीक है। पहले जिन क्षेत्रों को केवल पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, आज वहां महिलाएं अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर पहचान बना रही हैं। यह बदलाव केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों की महिलाएं भी अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
#11YearsOfSashaktNari: एक अभियान, एक सम्मान
प्रधानमंत्री ने इस अभियान को ‘#11YearsOfSashaktNari’ के तहत प्रस्तुत किया है, जो न केवल सरकारी प्रयासों की उपलब्धियों को दिखाता है, बल्कि हर उस महिला को सम्मान देता है, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सच किया। यह अभियान देशभर में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करने और उन्हें प्रेरित करने का कार्य कर रहा है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश भारत की महिलाओं को एक नई ऊर्जा और विश्वास देने वाला है। यह सिर्फ एक ट्वीट नहीं, बल्कि हर उस महिला की कहानी है जो संघर्ष से सफलता तक का सफर तय कर चुकी है या कर रही है। सशक्त नारी ही विकसित भारत की असली पहचान है।