HIT AND HOT NEWS

भारत में बाढ़: एक स्थायी प्राकृतिक चुनौती


Anoop singh

नई दिल्ली, 10 जून 2025 — भारत, जो अपनी भौगोलिक विविधता और जलवायु विविधता के लिए जाना जाता है, प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम से अछूता नहीं है। विशेष रूप से बाढ़, एक ऐसी आपदा है जो देश के कई हिस्सों को नियमित रूप से प्रभावित करती है। हर साल, यह न केवल हजारों लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर देती है, बल्कि कृषि, बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचाती है।

बाढ़ की प्रमुख वजहें

भारत में बाढ़ आने के पीछे कई प्राकृतिक और मानवीय कारण हैं। प्रमुख कारणों में भारी मानसूनी वर्षा, नदियों का उफान, बांधों का टूटना, जल निकासी व्यवस्था की खराबी, और शहरीकरण के कारण भूमि का अतिक्रमण शामिल है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने से उत्पन्न जलस्तर भी कई बार उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करता है।

बाढ़-प्रभावित क्षेत्र

उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्य बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। खासकर असम में ब्रह्मपुत्र नदी और बिहार में गंडक व कोसी नदियाँ हर साल बाढ़ का कारण बनती हैं। शहरी क्षेत्रों में, जैसे मुंबई और चेन्नई, जलभराव और बाढ़ का खतरा अत्यधिक वर्षा और अवरुद्ध नालों के कारण बढ़ जाता है।

बाढ़ का प्रभाव

बाढ़ का प्रभाव बहुआयामी होता है:

समाधान और उपाय

बाढ़ से निपटने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारें मिलकर कई योजनाएँ चला रही हैं, जैसे:

निष्कर्ष

भारत में बाढ़ एक प्राकृतिक समस्या है, लेकिन इसके दुष्प्रभावों को कम करना पूरी तरह से हमारे प्रयासों पर निर्भर करता है। सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, और आधुनिक तकनीकी उपायों को अपनाकर हम इस आपदा को एक अवसर में बदल सकते हैं — एक ऐसा अवसर जहाँ हम प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर आगे बढ़ें।


Exit mobile version