
हरिद्वार शहर में 10 जून 2025 को उत्तराखंड पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए तीन ऐसे युवकों को गिरफ्तार किया, जो क्षेत्र में सामाजिक शांति और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। यह कार्रवाई न केवल समय पर हुई बल्कि संभावित सांप्रदायिक तनाव को भी टाल दिया गया।
क्या था मामला?
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ युवक हरकी पैड़ी क्षेत्र के आसपास धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाली गतिविधियों की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही हरिद्वार पुलिस ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए संदिग्धों पर निगरानी शुरू की और कुछ ही घंटों में तीन युवकों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ और प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ये युवक सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काऊ संदेश फैलाने और भीड़ इकट्ठा करने का प्रयास कर रहे थे।
जब्त किए गए सबूत
पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, कुछ लिखित सामग्री और सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़े डाटा जब्त किए हैं। प्रारंभिक विश्लेषण से पता चला है कि ये युवक बाहरी तत्वों के संपर्क में थे, जो क्षेत्र में धार्मिक असंतुलन पैदा करना चाहते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल भी जांच में शामिल हो गई है।
पुलिस की सराहनीय तत्परता
हरिद्वार पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने मीडिया को बताया, “हमारी प्राथमिकता है कि हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थल की शांति और प्रतिष्ठा को किसी भी हालत में बिगड़ने न दिया जाए। इस ऑपरेशन में हमारे खुफिया तंत्र और साइबर टीम ने अहम भूमिका निभाई है।”
स्थानीय जनता का समर्थन
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की प्रशंसा की और शांति बनाए रखने की अपील की। सामाजिक संगठनों ने इस कार्य को “सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल” बताया और उम्मीद जताई कि कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
आगे की कार्रवाई
तीनों आरोपियों को फिलहाल न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उनके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब इनके नेटवर्क और उद्देश्य की गहराई से जांच कर रही है।
निष्कर्ष:
हरिद्वार में उत्तराखंड पुलिस की यह त्वरित और साहसिक कार्रवाई न केवल एक संभावित खतरे को टालने में सफल रही, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। यह घटना एक चेतावनी भी है कि सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोई भी कोशिश अब बच नहीं सकेगी।