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G20 के शेरपा अमिताभ कांत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात: वैश्विक आर्थिक सहयोग पर महत्वपूर्ण चर्चा

Anoop singh

भारत की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और G20 के शेरपा श्री अमिताभ कांत की हालिया बैठक वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, और निवेश को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह बैठक भारत की G20 अध्यक्षता के तहत महत्वपूर्ण नीतिगत संवाद का हिस्सा रही, जिसमें बहुपक्षीय वित्तीय सहयोग और सतत विकास के मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

G20 और भारत की भूमिका

G20 एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसमें दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। भारत 2025 में अपनी अध्यक्षता के दौरान सतत विकास, डिजिटल परिवर्तन, और वित्तीय स्थिरता जैसे विषयों पर जोर दे रहा है। श्री अमिताभ कांत, जो G20 के शेरपा के रूप में कार्यरत हैं, इस प्रक्रिया में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। उनकी वित्त मंत्री से हुई मुलाकात का उद्देश्य भारत के आर्थिक दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर मजबूती देना था।

चर्चा के मुख्य बिंदु

इस बैठक में निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया:

  1. वैश्विक आर्थिक सुधार – कोविड-19 महामारी के बाद, वैश्विक अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। इस संदर्भ में, भारत की नीतिगत रणनीति और G20 देशों के साथ वित्तीय सहयोग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
  2. डिजिटल और फिनटेक क्रांति – भारत डिजिटल भुगतान और फिनटेक नवाचार में अग्रणी है। बैठक में इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने के तरीकों पर चर्चा हुई।
  3. सतत विकास और हरित वित्तीय प्रणाली – जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के तहत, भारत की हरित वित्तीय रणनीति को वैश्विक निवेशकों के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया।
  4. वैश्विक व्यापार नीतियाँ – बैठक में भारत के निर्यात और व्यापार नीतियों को बढ़ावा देने पर विचार किया गया, जिससे विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सके।

भविष्य की संभावनाएँ

भारत की G20 अध्यक्षता एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है, जिसमें देश वैश्विक आर्थिक नीतियों को आकार देने में अपनी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। अमिताभ कांत और निर्मला सीतारमण की बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिससे भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और सशक्त कर सकता है।

यह बैठक भारत की आर्थिक शक्ति, वैश्विक सहयोग, और रणनीतिक नीति-निर्माण की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ने का संकेत देती है। G20 देशों के साथ समन्वय बढ़ाकर, भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता और विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में मदद कर सकता है।

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