
पटना — राजधानी पटना एक बार फिर गोलियों की गूंज से दहल उठी जब शहर के व्यस्त इलाके में दिनदहाड़े अज्ञात हमलावरों ने एक व्यक्ति को गोली मार दी। यह घटना न केवल राजधानी की कानून-व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है, बल्कि बिहार में बढ़ते अपराध के संकेत भी देती है।
घटना का विवरण
पुलिस के अनुसार, यह वारदात पटना सिटी अनुमंडल क्षेत्र के अंतर्गत हुई, जहाँ मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने अचानक एक स्थानीय दुकानदार पर फायरिंग कर दी। पीड़ित को तुरंत नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।
पुलिस की कार्रवाई और शुरुआती निष्कर्ष
घटना के तुरंत बाद पटना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू कर दी गई। प्रारंभिक जांच में आपसी रंजिश की आशंका जताई गई है, हालांकि अन्य संभावनाओं को भी खारिज नहीं किया गया है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है।
कानून व्यवस्था पर सवाल
यह कोई पहली घटना नहीं है जब पटना में सरेआम गोलीबारी हुई हो। पिछले कुछ महीनों में इस तरह की कई वारदातें सामने आ चुकी हैं, जिनमें अधिकतर मामलों में आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं। इससे यह साफ होता है कि अपराधियों में कानून का डर कम हो गया है और प्रशासन की पकड़ ढीली पड़ी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना पर विपक्ष ने राज्य सरकार को घेरा है। नेताओं का कहना है कि नीतीश सरकार राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने में असफल हो चुकी है। वहीं, सरकार ने दावा किया है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और घटना की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
समाज में बढ़ती असहिष्णुता और मानसिकता की समस्या
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे अपराध केवल पुलिस की नाकामी नहीं दर्शाते, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि समाज में हिंसा और असहिष्णुता कितनी बढ़ गई है। छोटी-छोटी बातों में क्रोध, असहनशीलता और तुरंत प्रतिशोध की प्रवृत्ति चिंताजनक है।
निष्कर्ष
पटना में हुई यह गोलीकांड की घटना एक चेतावनी है — न केवल प्रशासन के लिए, बल्कि समाज के हर नागरिक के लिए भी। अपराधियों को जल्द गिरफ्तार करना आवश्यक है, परंतु उससे भी जरूरी है एक ऐसे माहौल का निर्माण करना जहाँ कानून का डर हो और सामाजिक समरसता बनी रहे।