
नई दिल्ली, 11 जून 2025 — कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की अभिनव पहल के तहत जन शिक्षण संस्थान (JSS) द्वारा तिहाड़ की रोहिणी जेल में कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह पर अग्रसर किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 60 कैदियों ने प्लम्बिंग और इलेक्ट्रिकल ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त कर सफलतापूर्वक प्रमाणपत्र हासिल किया है।
यह आयोजन कौशल विकास मंत्रालय और रोहिणी जेल प्रशासन के संयुक्त प्रयास से संभव हो पाया। जन शिक्षण संस्थान जहांगीरपुरी द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में 40 कैदियों ने इलेक्ट्रिकल और 20 ने प्लम्बिंग कोर्स पूरा किया। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें NCVET (राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किए गए, जिन्हें वे ‘सिद्ध’ पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं।
सरकारी अधिकारी और जेल प्रशासन की सराहना
कार्यक्रम के अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सचिव श्री अतुल कुमार तिवारी ने कैदियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “जेल जैसी चुनौतीपूर्ण जगह पर प्रशिक्षण देना आसान नहीं होता, लेकिन JSS ने यह कार्य प्रभावी ढंग से पूरा किया है। हमारा उद्देश्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि हम इन लाभार्थियों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर दिलाने में भी सहयोग करेंगे।”
तिहाड़ जेल के महानिदेशक श्री सतीश गोलचा ने जन शिक्षण संस्थान और प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह प्रशिक्षण कैदियों के जीवन में नई शुरुआत की तरह है। इससे वे आत्मनिर्भर बनेंगे और जेल के बाद समाज में पुनः सम्मानपूर्वक जीवन जी सकेंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि तिहाड़ में आयोजित रोजगार मेलों के माध्यम से कैदियों को बाहरी दुनिया से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में अहम कदम
इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य कैदियों को एक नया जीवन कौशल देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ना है। इस कौशल के साथ वे न केवल अपनी आजीविका कमा सकते हैं बल्कि जेल से रिहा होने के बाद समाज में सकारात्मक योगदान भी दे सकते हैं।
JSS योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए संचालित की जा रही है, जो अशिक्षित, नवसाक्षर या 15-45 आयु वर्ग के स्कूल छोड़ चुके हैं। अब तक देश भर में 289 JSS केंद्रों के माध्यम से 31 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 82.63 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह योजना विशेष रूप से वंचित, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगजन और बीपीएल वर्ग के लिए निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है।