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दिल्ली हाईकोर्ट ने शबीर अहमद शाह की जमानत याचिका खारिज की, 2017 के टेरर फंडिंग केस में राहत नहीं


Anoop singh

नई दिल्ली, 12 जून 2025 — कश्मीरी अलगाववादी नेता शबीर अहमद शाह को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें किसी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला 2017 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज टेरर फंडिंग केस से जुड़ा है, जिसमें शाह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस नवीन चावला और शालिंदर कौर शामिल थे, ने इस अपील को खारिज कर दिया। इससे पहले 2023 में ट्रायल कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका को अस्वीकार कर दिया था।

24 मामलों में संलिप्तता का आरोप

दायर याचिका के अनुसार, शबीर शाह के खिलाफ कुल 24 मामले दर्ज हैं। इनमें से 18 मामलों में उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की जा चुकी है, 3 मामले खारिज हो चुके हैं, जबकि अन्य 3 अब भी जांच के अधीन हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने शाह की ओर से पैरवी की और अदालत को बताया कि यह एक नई जमानत याचिका है, क्योंकि अब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और आरोपी को हिरासत में 7 साल से अधिक हो गए हैं।

UAPA की धारा 43D(5) बनी बाधा

याचिका में यह तर्क भी दिया गया कि ट्रायल कोर्ट ने UAPA की धारा 43D(5) का हवाला देते हुए जमानत देने से इनकार किया था, जो गंभीर आरोपों की स्थिति में जमानत को सीमित करती है। अदालत ने माना कि प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि हो रही है और इस वजह से आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।

याचिका में उठाए गए तर्क

शाह की ओर से अदालत में यह भी दलील दी गई कि उनके खिलाफ कोई ठोस भौतिक साक्ष्य नहीं हैं, उन्हें लंबे समय से हिरासत में रखा गया है और अब तक उनके खिलाफ किसी भी अपराध के सीधे प्रमाण नहीं मिले हैं। बावजूद इसके, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका को अस्वीकार कर दिया।

आगे की राह

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देशभर में आतंकवाद के खिलाफ कड़ी नीति अपनाई जा रही है और अदालतें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में बेहद सख्ती दिखा रही हैं। अब यह देखना होगा कि शबीर अहमद शाह के वकील सुप्रीम कोर्ट की शरण लेते हैं या नहीं।


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