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रायसीना मेडिटेरेनियन 2025 सम्मेलन: भारत, फ्रांस और यूरोप की साझेदारी पर जयशंकर और जीन नोएल बारो की महत्वपूर्ण चर्चा

नई दिल्ली, 13 जून 2025 — राजधानी में आयोजित रायसीना मेडिटेरेनियन 2025 सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण मंत्री स्तरीय सत्र देखने को मिला, जिसमें भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बारो (JN Barrot) ने हिस्सा लिया। इस सत्र का केंद्रबिंदु था — “फ्रांस, भारत और यूरोप: साझेदारी के नए आयाम”

वैश्विक परिवेश में साझेदारी की आवश्यकता

सत्र के दौरान दोनों नेताओं ने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों — जैसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग — पर अपनी चिंता जाहिर की। डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहराने का यह समय है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूती दी जा सके।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर ज़ोर

फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बारो ने हिंद महासागर में सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने के लिए भारत-फ्रांस-यूरोप त्रिपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने साझा नौसैनिक अभ्यास, साइबर सुरक्षा, और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं पर बल दिया।

तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में साझा लक्ष्य

दोनों देशों ने उन्नत प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। डॉ. जयशंकर ने यूरोपीय संघ के देशों को भारत में मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया अभियानों में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

इंडो-पैसिफिक में साझा दृष्टिकोण

सत्र में यह स्पष्ट हुआ कि फ्रांस और भारत दोनों इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को एक मुक्त, समावेशी और शांतिपूर्ण क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फ्रांस ने इस दिशा में भारत के नेतृत्व को महत्वपूर्ण बताया और सहयोग के नए अवसरों की संभावनाएं तलाशने पर सहमति बनी।

जलवायु और ऊर्जा पर साझा संकल्प

रायसीना मेडिटेरेनियन 2025 सम्मेलन का यह मंत्री स्तरीय सत्र भारत, फ्रांस और यूरोप के बीच सद्भाव, सहयोग और साझा जिम्मेदारियों को नई दिशा देने वाला साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चर्चा निकट भविष्य में त्रिपक्षीय संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगी और वैश्विक मंच पर भारत-फ्रांस-यूरोप साझेदारी को एक नई ऊंचाई तक ले जाएगी।

जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी।

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