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पत्रकार कोम्मिनेनी श्रीनिवास राव को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, टीवी डिबेट विवाद में थी गिरफ्तारी

Anoop singh

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए वरिष्ठ पत्रकार कोम्मिनेनी श्रीनिवास राव (KSR) को जमानत दे दी है। उनकी गिरफ्तारी एक लाइव टेलीविज़न डिबेट शो के दौरान एक पैनलिस्ट द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर हुई थी, जिसमें राव बतौर होस्ट मौजूद थे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राव ने स्वयं कोई आपत्तिजनक या मानहानिकारक टिप्पणी नहीं की है, और एक पत्रकार के रूप में टीवी शो में उनकी भूमिका को संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए।

क्या था मामला?

यह मामला ‘साक्षी टीवी’ के एक लाइव न्यूज शो से जुड़ा है, जिसमें एक पैनलिस्ट ने अमरावती को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उसने कहा था कि “अमरावती वेश्याओं की राजधानी है” और “वहां सिर्फ एड्स के मरीज रहते हैं”। इन बयानों को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें कहा गया कि इस प्रकार की टिप्पणियाँ महिलाओं का अपमान करती हैं और सामाजिक भावना को ठेस पहुंचाती हैं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कार्यक्रम के होस्ट कोम्मिनेनी श्रीनिवास राव ने पैनलिस्ट की इन बातों को न तो रोका और न ही उन्हें टोकने की कोशिश की, बल्कि वे हँसते हुए दिखाई दिए।

कोर्ट में क्या हुआ?

आज की सुनवाई के दौरान, राव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ डेव ने दलील दी कि राव का इन आपत्तिजनक बयानों से कोई संबंध नहीं है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने यह कहा कि राव की चुप्पी और हँसी को उनकी मिलीभगत माना जाना चाहिए।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आमतौर पर जब कोई पैनलिस्ट इस तरह के अतिरेकपूर्ण बयान देता है, तो वह अनायास ही हँसी उत्पन्न कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि इसे साजिश या समर्थन के रूप में नहीं देखा जा सकता, जब तक कि कोई ठोस प्रमाण न हो।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

कोर्ट ने कहा कि एक टीवी डिबेट शो में पत्रकार की भूमिका को स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जाना चाहिए और जब तक कोई पत्रकार स्वयं आपत्तिजनक बात नहीं करता, उसे अपराधी के रूप में नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता की स्वतंत्रता को संरक्षण दिया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

इस निर्णय को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता की सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इस ओर संकेत करता है कि डिबेट शो में अतिथि की बातों के लिए होस्ट को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं जब तक कि वह स्वयं उन बयानों में भागीदार न हो।

अब कोम्मिनेनी श्रीनिवास राव को इस मामले में अंतरिम राहत मिल चुकी है, और यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।

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