
नई दिल्ली, 19 जून 2025 – लंदन में अपनी पत्नी की हत्या के संगीन आरोप का सामना कर रहे एक व्यक्ति ने भारत की राजधानी में स्थित दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। आरोपी ने यह याचिका ब्रिटेन द्वारा मांगे गए प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ दायर की है और दावा किया है कि अगर उसे यूके भेजा गया, तो वहां उसे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।
क्या है मामला?
यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया जब लंदन पुलिस ने एक भारतीय मूल के व्यक्ति को उसकी पत्नी की हत्या के मामले में वांछित घोषित किया। जांच में सामने आया कि हत्या के बाद वह व्यक्ति भारत भाग आया था और लंबे समय से फरार था। ब्रिटिश अधिकारियों ने भारत सरकार से उसका प्रत्यर्पण मांगा, जिस पर भारत में प्रक्रियाएं शुरू की गईं।
दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका का मकसद
आरोपी ने अपनी याचिका में कहा है कि:
- उसे लंदन में निष्पक्ष ट्रायल की उम्मीद नहीं है।
- उसकी जान को खतरा है।
- प्रत्यर्पण मानवीय अधिकारों का उल्लंघन होगा।
उसका कहना है कि वह भारत का नागरिक है और भारतीय संविधान उसे सुरक्षा प्रदान करता है, इसलिए उसे जबरन किसी और देश में सौंपना उसके मूल अधिकारों का हनन होगा।
सरकार की दलील
भारत सरकार की तरफ से पेश हुए वकीलों ने तर्क दिया कि भारत और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि है और इस मामले में ब्रिटिश पक्ष ने सभी औपचारिकताएं पूरी की हैं। इस संधि के तहत भारत पर कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे आरोपियों को सौंपे ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।
कोर्ट की अगली सुनवाई
कोर्ट ने फिलहाल आरोपी को अंतरिम राहत देते हुए उसे हिरासत में रखने की बजाय एक सीमित समय के लिए सुरक्षा प्रदान की है। साथ ही केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई की तारीख अगले सप्ताह तय की गई है।
समाज में उठे सवाल
इस मामले ने कानून, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं:
- क्या भारत किसी ऐसे व्यक्ति को प्रत्यर्पित करेगा जो यहां नागरिकता का दावा कर रहा है?
- क्या लंदन की अदालतें उसे निष्पक्ष सुनवाई देंगी?
- क्या अंतरराष्ट्रीय अपराधों में मानवीय आधारों पर राहत दी जा सकती है?
निष्कर्ष
यह मामला न केवल एक आपराधिक अभियोजन की प्रक्रिया है, बल्कि यह दो देशों के बीच कूटनीतिक और कानूनी जटिलताओं का प्रतिनिधित्व करता है। अदालत के फैसले पर अब पूरे देश की निगाहें टिकी हैं क्योंकि यह आने वाले समय में अन्य प्रत्यर्पण मामलों की दिशा भी तय कर सकता है।