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19 जून: युद्ध और संघर्ष में यौन हिंसा के खिलाफ वैश्विक चेतना का दिन

Anoop singh

हर साल 19 जून को दुनिया भर में युद्ध और सशस्त्र संघर्षों के दौरान यौन हिंसा के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन उन पीड़ितों की पीड़ा और संघर्ष को याद करने का अवसर है, जिन्होंने युद्ध के दौरान बलात्कार, यौन शोषण, जबरन विवाह और अन्य अमानवीय कृत्यों का सामना किया है।

संयुक्त राष्ट्र की पहल

संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस की स्थापना युद्ध में यौन हिंसा को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के विरुद्ध वैश्विक चेतना फैलाने के उद्देश्य से की थी। यौन हिंसा का प्रयोग न केवल व्यक्तियों को, बल्कि पूरे समुदायों को तोड़ने, अपमानित करने और नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

पीड़ितों की आवाज़ और न्याय की मांग

यह दिन उन लाखों पीड़ितों को सम्मान देने का भी अवसर है, जिनकी आवाज़ आज भी दबाई गई है या जिन्हें समाज में शर्म और कलंक का सामना करना पड़ता है। इन घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार अपराधियों को सज़ा दिलाना और न्याय प्रक्रिया को मजबूत करना इस दिवस की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है।

जागरूकता और समर्थन की आवश्यकता

दुनिया भर में विभिन्न संगठन इस दिन को यौन हिंसा के खिलाफ कड़े कानूनों की मांग, पीड़ितों के पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक सहयोग की व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाने के लिए उपयोग करते हैं। शिक्षा, जन-जागरूकता और पीड़ित-केंद्रित नीतियाँ इस समस्या से निपटने के प्रभावी साधन हैं।

शांति की ओर एक कदम

जब तक युद्ध के दौरान किए गए अपराधों पर रोक नहीं लगाई जाती और पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, तब तक स्थायी शांति की कल्पना अधूरी रहेगी। यह दिन न केवल महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की रक्षा की बात करता है, बल्कि युद्ध के दौरान पुरुषों और लड़कों के साथ होने वाली यौन हिंसा को भी सामने लाता है।

निष्कर्ष

19 जून केवल एक तारीख नहीं, बल्कि एक संकल्प है—ऐसे अपराधों के खिलाफ एकजुट होने का, और यह सुनिश्चित करने का कि संघर्ष के किसी भी दौर में मानव गरिमा और सम्मान से समझौता न किया जाए। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम चुप्पी तोड़ें, पीड़ितों का साथ दें और एक न्यायपूर्ण समाज की ओर कदम बढ़ाएं।

“शांति तभी संभव है जब न्याय हर पीड़ित तक पहुँचे।”


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