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इज़रायली प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर संयुक्त हमले की घोषणा की: एक ऐतिहासिक सैन्य

Anoop singh

यरुशलम, जून 2025 — एक अभूतपूर्व और साहसिक कदम उठाते हुए इज़रायल के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर एक विशेष संबोधन में अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। यह सैन्य ऑपरेशन “ऑपरेशन अम केलावी” (जिसका अर्थ है “शेर के दिल के साथ”) नाम से संचालित किया गया, जो क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

लक्ष्य: ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकाने

इस अभियान के तहत ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों—फोर्डो, नतांज़ और इस्फहान—को निशाना बनाया गया। प्रधानमंत्री ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी रणनीतिक समन्वय के साथ की गई, जिसमें इज़रायली रक्षा बल (IDF), मोसाद और अमेरिकी सशस्त्र बल शामिल थे।

वादा पूरा करने का दावा

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा, “यह उस वादे की पूर्ति है जो मैंने अपने देशवासियों से किया था। ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं से उत्पन्न खतरे को आज निर्णायक रूप से जवाब दिया गया है।”

उन्होंने यह भी बताया कि अभियान की सफलता के तुरंत बाद उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्यक्तिगत रूप से बात की और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के बलों की सराहना करते हुए इस साझेदारी को ऐतिहासिक करार दिया।

ट्रंप की भूमिका पर विशेष प्रशंसा

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रंप की नेतृत्व क्षमता की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें एक “दृढ़ और भरोसेमंद साझेदार” बताया, जिन्होंने कठिन समय में इज़रायल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होकर सहयोग किया।

उद्देश्य: रक्षात्मक और निवारक कार्रवाई

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से रक्षात्मक और निवारक थी। उनके अनुसार, “ईरान का परमाणु कार्यक्रम न केवल इज़रायल के लिए बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरा बनता जा रहा था।”

वैश्विक प्रतिक्रिया का इंतजार

हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी इस हमले पर अपनी प्रतिक्रियाएँ देने की तैयारी कर रहा है, लेकिन सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इससे पश्चिम एशिया में तनाव नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पहले ही तनाव को कम करने की अपील की है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के अंत में कहा, “हम उद्देश्य में एकजुट हैं, रक्षा में अडिग हैं, और विजय को लेकर आत्मविश्वासी हैं।”
यह कदम न केवल सैन्य दृष्टिकोण से बल्कि भू-राजनीतिक स्तर पर भी एक क्रांतिकारी घटना मानी जा रही है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा।


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