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आयुष्मान भारत योजना के लाभ से वंचित वरिष्ठ नागरिक पर दिल्ली उच्च न्यायालय की सख्ती

Anoop singh

नई दिल्ली, 22 जून 2025 — दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और पश्चिम विहार स्थित एक निजी अस्पताल को नोटिस जारी किया है। यह कदम तब उठाया गया जब 73 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक रामिंदर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि आयुष्मान भारत योजना का कार्ड होने के बावजूद उन्हें अस्पताल में इलाज के लिए ₹25,000 जमा कराने को कहा गया।

क्या है मामला?

रामिंदर सिंह को 10 जून को सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने अस्पताल में आयुष्मान भारत कार्ड दिखाया, जो भारत सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निशुल्क इलाज मुहैया कराना है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि “आयुष्मान काउंटर बंद है” और तत्काल योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता।

परिजनों को आश्वस्त किया गया कि बाद में राशि लौटा दी जाएगी, लेकिन जब उन्होंने फॉलो-अप किया, तो बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ केवल तभी मिलेगा जब सर्जरी की आवश्यकता हो—यह स्पष्ट रूप से योजना की गलत व्याख्या है।

चौंकाने वाला आरोप

रामिंदर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने डिस्चार्ज की प्रक्रिया शुरू की, तो अस्पताल ने उनकी मेडिकल फाइल और दस्तावेज देने से इनकार कर दिया, जिससे वह किसी अन्य अस्पताल में इलाज या कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में असमर्थ हो गए।

अदालत की प्रतिक्रिया

न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित सभी पक्षों से 8 जुलाई तक जवाब मांगा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल एक व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं की साख पर भी सवाल खड़े करता है।

वृहद स्तर पर चिंता

यह मामला एक व्यापक समस्या की ओर इशारा करता है—कि कैसे कई निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं के लाभों को या तो गलत तरीके से लागू करते हैं या जानबूझकर टालते हैं। इसका असर सीधे तौर पर उन जरूरतमंद नागरिकों पर पड़ता है जो सरकारी योजनाओं पर निर्भर हैं।

संभावित परिणाम

अगर अदालत इस मामले में कड़ा रुख अपनाती है, तो यह अन्य निजी अस्पतालों के लिए भी चेतावनी का संकेत होगा और आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।


निष्कर्ष:
आयुष्मान भारत योजना की सफलता तभी मानी जाएगी जब इसके लाभ जरूरतमंदों तक निर्बाध रूप से पहुंचें। दिल्ली उच्च न्यायालय का यह कदम निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है कि देश की न्यायपालिका ऐसे मामलों में गंभीरता से हस्तक्षेप कर रही है।

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