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भारत के प्रमुख पठार: भौगोलिक विविधता की अद्भुत छवि


Anoop singh

भारत एक विविध भौगोलिक संरचना वाला देश है, जहाँ पर्वत, मैदान, रेगिस्तान और तटीय क्षेत्र के साथ-साथ विस्तृत पठारी क्षेत्र भी पाए जाते हैं। ये पठार न केवल भारत की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं, बल्कि खनिज, कृषि और वन संसाधनों का भी प्रमुख स्रोत हैं। इस लेख में हम भारत के प्रमुख पठारों की विशेषताओं, स्थिति और महत्त्व पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।

1. दक्कन पठार (Deccan Plateau)

स्थिति: यह पठार भारत के दक्षिणी भाग में स्थित है और देश का सबसे बड़ा पठार माना जाता है। यह तीन ओर से पर्वतों से घिरा हुआ है — पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और सतपुड़ा पर्वतमाला।

विशेषताएं:

2. मालवा पठार (Malwa Plateau)

स्थिति: यह मध्य भारत में स्थित है, मुख्यतः मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है।

विशेषताएं:

3. छोटा नागपुर पठार (Chotanagpur Plateau)

स्थिति: यह झारखंड राज्य का प्रमुख भू-आकृतिक क्षेत्र है और इसके कुछ हिस्से पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ में भी फैले हैं।

विशेषताएं:

4. बुंदेलखंड पठार (Bundelkhand Plateau)

स्थिति: यह पठार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच स्थित है।

विशेषताएं:

5. राजमहल पठार (Rajmahal Hills/Plateau)

स्थिति: यह झारखंड के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है।

विशेषताएं:


पठारी क्षेत्रों का राष्ट्रीय महत्त्व

भारत के पठारी क्षेत्र केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं:


निष्कर्ष

भारत के प्रमुख पठार न केवल देश की भौगोलिक विविधता को दर्शाते हैं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक नींव को भी मज़बूती प्रदान करते हैं। ये पठार भारतीय उपमहाद्वीप की संरचनात्मक परतों का गौरवशाली प्रतीक हैं, जिनकी महत्ता समय के साथ और अधिक बढ़ती जा रही है। इनके संरक्षण, सतत दोहन और समुचित विकास से ही भारत की प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।


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