
न्यूयॉर्क, 23 जून 2025 – ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उथल-पुथल मच गई है। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और चेतावनी दी है कि यह कदम मध्य पूर्व में और वैश्विक स्तर पर गंभीर अस्थिरता को जन्म दे सकता है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक के दौरान चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कोंग ने कहा कि बल प्रयोग से हालात और बिगड़ सकते हैं और यह क्षेत्रीय तनाव को विस्फोटक मोड़ पर ले जा सकता है। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में कार्य करने की अपील की।
फू कोंग ने विशेष रूप से इजरायल को आड़े हाथों लेते हुए तुरंत शत्रुतापूर्ण कार्रवाई बंद करने की मांग की और चेताया कि यह संघर्ष सीमाओं से बाहर फैल सकता है, जिससे पड़ोसी देशों और वैश्विक शांति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
चीन के राजदूत ने यह भी कहा कि अमेरिका का यह कदम उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने कहा, “ईरान को नुकसान पहुंचा है, लेकिन अमेरिका ने भी अपने वैश्विक नेतृत्व और कूटनीतिक विश्वासनीयता को आघात पहुंचाया है।” चीन का मानना है कि वाशिंगटन की सैन्य कार्रवाइयाँ शांति प्रक्रिया को बाधित करती हैं और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के खिलाफ हैं।
इस घटनाक्रम के बीच चीन, रूस और पाकिस्तान ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र में एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया है जिसमें पूरे मध्य पूर्व में तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की गई है। चीनी सरकारी प्रसारणकर्ता CCTV ने भी चेतावनी दी है कि यदि सैन्य गतिविधियाँ जारी रहीं तो यह संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय संकट में तब्दील हो सकता है।
वहीं व्हाइट हाउस के बाहर और कई देशों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। वैश्विक नेताओं में भी गहरी चिंता व्याप्त है। चीन की ओर से आया यह स्पष्ट संदेश अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी देता है कि अब प्रतिशोध नहीं, संयम और संवाद की नीति अपनाने का समय है।
निष्कर्षतः, चीन की यह प्रतिक्रिया केवल अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ विरोध नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक कूटनीतिक संदेश है कि यदि विश्व समुदाय ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो यह संघर्ष वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।