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जानलेवा बीमारी से जंग में जीत: जीन एडिटिंग की मदद से फिलाडेल्फिया के नवजात को मिला नया जीवन

Anoop singh

फिलाडेल्फिया, 23 जून 2025 – विज्ञान और चिकित्सा की दुनिया में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है, जब अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर में डॉक्टरों ने एक नवजात शिशु की जान बचाने के लिए जीन एडिटिंग तकनीक का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया। यह मामला चिकित्सा विज्ञान में उस मोड़ को दर्शाता है जहाँ तकनीक, समय और इंसानियत मिलकर चमत्कार रचते हैं।

शिशु “केजे” का जन्म पिछले वर्ष हुआ था और शुरुआत में वह पूरी तरह स्वस्थ प्रतीत हो रहा था। लेकिन कुछ ही सप्ताहों में उसमें असामान्य लक्षण दिखने लगे – वह सामान्य से कहीं अधिक सो रहा था, और उसकी सक्रियता में कमी देखी जा रही थी। डॉक्टरों ने जाँच की तो पाया कि उसके शरीर में अमोनिया का स्तर खतरनाक रूप से अधिक था।

आगे की जाँच में यह सामने आया कि केजे के जिगर में एक खास जीन में विकृति है, जिसकी वजह से उसका शरीर अमोनिया को रक्त से साफ नहीं कर पा रहा था। यह स्थिति जीवन के लिए अत्यंत घातक हो सकती थी, क्योंकि इससे कोमा या मृत्यु भी हो सकती थी।

समस्या की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की एक विशेषज्ञ टीम ने परंपरागत इलाजों की जगह एक वैकल्पिक उपाय अपनाया — एक अत्याधुनिक CRISPR-आधारित जीन एडिटिंग तकनीक। इस तकनीक के माध्यम से केजे के शरीर की जीन संरचना को लक्षित कर उसमें सुधार लाने की कोशिश की गई। इस विशेष जीन थेरेपी को अमेरिकी सरकार से आपातकालीन स्वीकृति मिली और कुछ ही महीनों में इलाज शुरू कर दिया गया।

इलाज के दौरान केजे को विशेष रूप से तैयार की गई जीन-संपादित दवा कई बार दी गई। लक्ष्य यह था कि उसके जिगर की कोशिकाएं इस सुधार के बाद अमोनिया को सही ढंग से प्रोसेस कर सकें। नतीजे चौंकाने वाले थे – कुछ ही महीनों में केजे की तबीयत में जबरदस्त सुधार देखने को मिला। अब न केवल उसके अमोनिया स्तर सामान्य हैं, बल्कि वह अपने विकास के महत्वपूर्ण पड़ावों को भी समय से पार कर रहा है।

यह मामला व्यक्तिगत चिकित्सा (पर्सनलाइज्ड मेडिसिन) और जीन थेरेपी के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी उपलब्धि है। पहली बार किसी एक मरीज की जेनेटिक प्रोफाइल को ध्यान में रखते हुए इतनी तेजी से विशेष दवा विकसित की गई और उसका प्रभाव भी दिखा।

हालाँकि यह इलाज अभी प्रयोगात्मक श्रेणी में आता है और इसके दीर्घकालिक प्रभावों की समीक्षा की जानी बाकी है, लेकिन केजे का मामला इस बात का प्रमाण है कि यदि विज्ञान, समर्पण और इच्छाशक्ति साथ हो, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

यह सफलता उन हजारों बच्चों और परिवारों के लिए आशा की किरण है, जो दुर्लभ और गंभीर आनुवांशिक रोगों से जूझ रहे हैं।

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