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ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई का दो टूक बयान: विदेशी हमलों को नकारा, ईरानी संप्रभुता पर अडिग

Anoop singh

तेहरान, 24 जून 2025 | खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक चुनौतीपूर्ण और साहसिक बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर जारी इस बयान में खामेनेई ने ईरान की आक्रामकता के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि ईरान किसी भी बाहरी आक्रमण के आगे न तो झुकेगा और न ही उसे सहन करेगा।

खामेनेई ने फारसी भाषा में पोस्ट करते हुए कहा, “हमने किसी पर हमला नहीं किया है और हम दूसरों की ओर से किसी भी आक्रमण को स्वीकार नहीं करते। हम किसी भी आक्रामक कार्रवाई के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेंगे। यही ईरानी राष्ट्र का तर्क है।” इस बयान ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया और कुछ ही घंटों में इसे 16 लाख से अधिक बार देखा गया, साथ ही हजारों लाइक्स और शेयर भी मिले।

पोस्ट के साथ साझा की गई तस्वीर में अमेरिकी झंडे को जलते हुए दिखाया गया है, जिसके पीछे विनाश का दृश्य है। यह प्रतीकात्मक चित्रण पश्चिमी ताकतों को ईरान की ताकत और उसकी प्रतिरोधक क्षमता का स्पष्ट संकेत देता है। साथ में उपयोग किए गए हैशटैग #اللهاکبر (#AllahuAkbar) और #بشارتفتح (#GladTidingsOfVictory) इस पूरे संदेश को धार्मिक आस्था और राष्ट्रवादी गर्व से भरपूर बनाते हैं।

यह बयान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उसी दिन की गई टिप्पणी के प्रतिउत्तर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरान के कथित हमलों की निंदा की थी और कतर व खाड़ी देशों के साथ फ्रांस की एकजुटता जाहिर की थी। मैक्रों के बयान ने कूटनीतिक जगत में हलचल पैदा कर दी, और खामेनेई का यह जवाब ईरान की दृढ़ता और स्वतंत्रता की भावना को उजागर करता है।

ईरान का यह रुख यह दर्शाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है और अपनी रक्षा को संप्रभु अधिकार मानता है। इस प्रकार की बयानबाज़ी और छवियाँ घरेलू जनता को एकजुट करने के साथ-साथ विदेशी ताकतों के लिए एक सख्त चेतावनी भी मानी जा रही हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर स्थिति को संभालने में कोई चूक हुई, तो यह पूरा संकट एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। जहां एक ओर विश्व समुदाय संयम बरतने की अपील कर रहा है, वहीं पेरिस और तेहरान के विरोधी बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पश्चिमी देशों और ईरान के बीच दरार और गहरी हो रही है।


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