
24 जून 2025 | न्यूयॉर्क/काबुल
संयुक्त राष्ट्र ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि मध्य पूर्व में बढ़ता हुआ संघर्ष अब अफगानिस्तान में मानवीय संकट को और अधिक गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान (UNAMA) के अनुसार, हालिया संघर्ष—विशेष रूप से ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव—के कारण ईरान से बड़ी संख्या में अफगान शरणार्थी लौट रहे हैं, जिससे अफगानिस्तान की पहले से ही जर्जर बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव पड़ रहा है।
यूएन सुरक्षा परिषद के समक्ष बोलते हुए UNAMA प्रमुख ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में अकेले ईरान से प्रतिदिन 10,000 से अधिक शरणार्थियों की वापसी हो रही है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा, “यह संघर्ष अब अफगानिस्तान को प्रभावित कर रहा है,” और चेतावनी दी कि खाड़ी क्षेत्र की हिंसा के परिणाम सीमाओं से परे फैल रहे हैं।
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान द्वारा कतर पर किए गए हमलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीव्र निंदा हो रही है और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ रही है। विश्व नेता संयम और वार्ता की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर मानवीय परिणाम पहले से ही देखे जा रहे हैं—विशेष रूप से अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में।
इन लौटते हुए शरणार्थियों में से अधिकांश के पास न तो आश्रय है, न चिकित्सा सुविधा और न ही आर्थिक सहायता के साधन। इससे अफगान स्थानीय समुदायों और सहायता संगठनों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। वर्षों के संघर्ष और अस्थिर राजनीतिक स्थिति से उबरने की कोशिश कर रहा अफगानिस्तान इस तरह की बड़ी संख्या को बिना अंतरराष्ट्रीय मदद के संभालने की स्थिति में नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने वैश्विक समुदाय से त्वरित कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने अफगानिस्तान के लिए मानवीय सहायता में तत्काल वृद्धि और मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए राजनयिक प्रयासों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
यह चेतावनी उन बढ़ती चिंताओं का हिस्सा है जो दर्शाती हैं कि यह संघर्ष न केवल खाड़ी देशों को अस्थिर कर रहा है, बल्कि उन नाजुक देशों की शांति और पुनर्निर्माण प्रक्रिया को भी खतरे में डाल रहा है, जो पहले से ही संकट की स्थिति में हैं।
मुख्य बिंदु:
ईरान से प्रतिदिन 10,000+ अफगान नागरिकों की वापसी
अफगानिस्तान की बुनियादी सेवाएं संकट में
वैश्विक समुदाय से मानवीय सहायता और कूटनीतिक हस्तक्षेप की अपील
खाड़ी संघर्ष के क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर गहरी चिंता