
वॉशिंगटन डी.सी., 23 जून 2025 — अमेरिका की सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक लेकिन विवादास्पद फैसले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई “थर्ड कंट्री डिपोर्टेशन” नीति को वैध ठहराते हुए इसकी पुनः बहाली की अनुमति दे दी है। इस फैसले के तहत अब अमेरिका में शरण की मांग कर रहे प्रवासियों को उनके अपने देश में वापस भेजने के बजाय किसी तीसरे देश में निर्वासित किया जा सकेगा – चाहे उस देश में उनके लिए कोई स्पष्ट सुरक्षा की गारंटी हो या नहीं।
क्या है यह नीति?
“थर्ड कंट्री डिपोर्टेशन” नीति के तहत, अमेरिकी आव्रजन अधिकारी उन प्रवासियों को अमेरिका में रहने से रोक सकते हैं जो सीमा पार करते समय किसी अन्य देश से होकर आए हों। उदाहरणस्वरूप, यदि कोई मध्य या दक्षिण अमेरिका का नागरिक मैक्सिको के रास्ते अमेरिका पहुंचता है, तो उसे अमेरिका में शरण देने के बजाय मैक्सिको या किसी अन्य ‘सुरक्षित’ माने जाने वाले देश में भेजा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
इस नीति को पहले एक संघीय अदालत ने मानवाधिकारों के उल्लंघन की आशंका के कारण अवैध घोषित किया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के बहुमत वाले निर्णय में इस नीति को संविधानसम्मत करार दिया गया है। बहुमत ने तर्क दिया कि यह नीति प्रशासनिक विवेक और सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी है, और अदालत इस क्षेत्र में सरकार के निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
न्यायिक असहमति
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट के छह न्यायाधीशों ने इस नीति का समर्थन किया, लेकिन तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने इसे “गंभीर मानवीय खतरे” की चेतावनी के साथ खारिज कर दिया। जस्टिस सोतोमयोर ने लिखा,
“यह निर्णय अमेरिका को उन मूल्यों से दूर ले जाता है जिनके तहत हमने शरणार्थियों को हमेशा इंसानियत और सुरक्षा दी है।”
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
मानवाधिकार समूहों और प्रवासी अधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। ह्यूमन राइट्स वॉच और एसीएलयू ने इसे “संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी संधि का उल्लंघन” बताया है। उनका कहना है कि इससे हजारों शरणार्थी खतरनाक परिस्थितियों में फंसे रहेंगे और अमेरिका की वैश्विक नैतिक स्थिति को धक्का पहुंचेगा।
राजनीतिक प्रभाव
यह फैसला राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न करता है। चुनावी वर्ष में यह मुद्दा रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच आव्रजन नीति को लेकर तीखी बहस को और तेज कर सकता है।
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय अमेरिका की आव्रजन नीति के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। जहां सरकार इसे सीमा नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम मान रही है, वहीं आलोचक इसे अमेरिका के मानवाधिकार मूल्यों पर गहरा आघात बता रहे हैं।