HIT AND HOT NEWS

ओमान का क्षेत्रीय तनाव पर कड़ा रुख: शांति और संवाद की अपीलदिनांक: 24 जून, 2025

Anoop singh

मस्कट: पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते तनाव और हिंसा की पृष्ठभूमि में, ओमान सल्तनत ने एक कड़ा और स्पष्ट बयान जारी करते हुए क्षेत्र में हालिया संघर्ष की कड़ी निंदा की है। ओमान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी इस बयान में 13 जून को “इस्राइल द्वारा इस्लामिक रिपब्लिक ईरान पर किए गए अवैध हमले” को क्षेत्रीय अस्थिरता का मुख्य कारण बताया गया है।

ओमान ने इस घटनाक्रम को “अस्वीकार्य और निंदनीय” करार दिया है, और इसकी कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि यह कार्रवाई एक संप्रभु देश की अखंडता का सीधा उल्लंघन है, जो खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) जैसे बहुपक्षीय मंच के सिद्धांतों के खिलाफ है।

बयान में चेतावनी दी गई कि यदि सैन्य संघर्ष ऐसे ही जारी रहता है, तो इससे क्षेत्रीय विकास ढांचा बिखर जाएगा, मानवीय संकट और अधिक गहराएगा, और आम नागरिकों का जीवन गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।

कतर को समर्थन, क्षेत्रीय एकता पर जोर

ओमान ने इस संकट के संदर्भ में कतर के साथ अपनी एकजुटता भी व्यक्त की और कहा कि हर राष्ट्र को अपने क्षेत्र की सुरक्षा और हितों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। ओमान ने स्पष्ट किया कि कतर वर्तमान हालात को देखते हुए जो भी कदम अपनी सुरक्षा के लिए उठा रहा है, वह न्यायसंगत और आवश्यक है।

सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में सभी पक्षों से अपील की कि वे तत्काल सैन्य और मिसाइल हमले बंद करें और बातचीत व अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मार्ग पर लौटें। ओमान ने ज़ोर देकर कहा कि शक्ति का प्रयोग केवल समस्याओं को और गहरा करता है, समाधान नहीं देता।

शांति स्थापना में ओमान की भूमिका

ओमान लंबे समय से एक शांतिप्रिय और मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। इस बार भी उसने कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक नेताओं से संयम बरतने और सकारात्मक संवाद के लिए पहल करने का आग्रह किया है। ओमान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के मूलभूत सिद्धांतों — आपसी सम्मान, संप्रभुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व — को फिर से दोहराया।

निष्कर्ष

पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम जहां युद्ध के बादल घना रहे हैं, वहीं ओमान की शांतिपूर्ण और संतुलित आवाज एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। संकट की इस घड़ी में ओमान का यह रुख दर्शाता है कि क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए हथियार नहीं, बल्कि वार्ता और सहयोग ही एकमात्र रास्ता है।


Exit mobile version