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मोबाइल टावर लगाने के नाम पर ठगी: जागरूक रहें, सावधान रहें

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नई दिल्ली।
देशभर में मोबाइल टावर लगाने के नाम पर हो रही ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आम लोगों को बड़े मुनाफे और मासिक किराए का लालच देकर कुछ फर्जी वेबसाइट्स और एजेंसियां उन्हें जाल में फंसा रही हैं। हाल ही में bansaltowerpvtltd.com और bansaltowergroup.in जैसी वेबसाइटों के माध्यम से टावर लगाने की सेवा देने का दावा किया जा रहा है। लेकिन जब इनकी गतिविधियों को गहराई से परखा गया, तो इसमें कई ऐसे तत्व पाए गए जो एक स्पष्ट ठगी की ओर इशारा करते हैं।


वेबसाइटों का भ्रमित करने वाला चेहरा

इन दोनों वेबसाइटों पर दावा किया गया है कि वे भारत में मोबाइल टावर लगाने की शीर्ष सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इनमें से एक वेबसाइट खुद को 15 वर्षों का अनुभवी बताती है और दूसरी मासिक ₹45,000 तक किराया देने की बात करती है। यही नहीं, इन प्लेटफॉर्म्स पर गार्ड की नियुक्ति और वेतन तक की बातें की गई हैं, जिससे यह सब कुछ असली और पेशेवर प्रतीत होता है। लेकिन गहराई से विश्लेषण करने पर कई विसंगतियाँ सामने आती हैं:

अलग-अलग पंजीकरण शुल्क: एक वेबसाइट ₹2,500 रजिस्ट्रेशन फीस लेती है जबकि दूसरी बिना शुल्क के प्रक्रिया का दावा करती है।

एक जैसी स्कीम और भाषा: दोनों साइटों पर टावर की समयावधि, गार्ड की नियुक्ति और भुगतान की बात एक जैसी है, जिससे लगता है कि इन्हें एक ही समूह द्वारा चलाया जा रहा है।

गोपनीय जानकारी की मांग: आधार कार्ड, बैंक खाता, भूमि दस्तावेज, पासपोर्ट फोटो जैसे संवेदनशील दस्तावेज मांगे जाते हैं।


धोखाधड़ी के सामान्य संकेत

यह कोई नया तरीका नहीं है। देशभर में इस प्रकार की ठगी के कई मामले रिपोर्ट हो चुके हैं। स्कैमर निम्नलिखित तरीकों से आम जनता को धोखा देने की कोशिश करते हैं:

  1. बड़े ब्रांड का नाम इस्तेमाल करना: Reliance Jio, Airtel, BSNL जैसे नामों का इस्तेमाल कर भरोसा दिलाने की कोशिश की जाती है।
  2. आकर्षक मासिक किराया: ₹45,000 प्रति माह जैसी मोटी रकम का वादा करके लालच दिया जाता है।
  3. अग्रिम भुगतान की मांग: आवेदन शुल्क, एग्रीमेंट चार्ज या सिक्योरिटी मनी के नाम पर ₹2,000 से लेकर ₹60,000 तक मांगे जाते हैं।
  4. फर्जी संपर्क जानकारी: मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी तो दिए जाते हैं लेकिन जब व्यक्ति फंस जाता है, तो संपर्क करना मुश्किल हो जाता है।

Jio और TRAI की चेतावनियाँ

Jio ने कई बार सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि उन्होंने कभी भी मोबाइल टावर लगाने के लिए किसी एजेंसी या व्यक्ति को अधिकृत नहीं किया है जो आम लोगों से पैसे मांगे। Jio ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे टावर इंस्टॉलेशन के लिए किसी भी प्रकार का अग्रिम शुल्क नहीं लेते।

इसी तरह TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) और DoT (दूरसंचार विभाग) ने भी चेतावनी दी है कि वे मोबाइल टावर लगाने के लिए कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी नहीं करते और ऐसे किसी लेन-देन से उनका कोई लेना-देना नहीं होता।


क्या करें और क्या न करें

सावधानी बरतें:

किसी भी अनजान वेबसाइट या व्यक्ति को पैसे न भेजें।

अपनी निजी जानकारी जैसे आधार, पैन, बैंक डिटेल्स आदि साझा न करें।

“बहुत अच्छा ऑफर” सुनकर जल्दबाज़ी में फैसला न लें।

फर्जी कॉल या मैसेज आने पर सतर्क रहें।

क्या करें:

यदि आप वास्तव में अपनी भूमि पर मोबाइल टावर लगवाना चाहते हैं, तो केवल अधिकृत टेलीकॉम कंपनियों से संपर्क करें।

टेलीकॉम विभाग की वेबसाइट www.dot.gov.in पर जाकर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं की सूची देखें।

किसी भी तरह की ठगी की आशंका हो तो राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।


निष्कर्ष

“मोबाइल टावर लगवाइए, ₹45,000 महीना पाइए” जैसी स्कीमें सुनने में तो अच्छी लगती हैं, लेकिन यह एक प्रचलित धोखाधड़ी का तरीका बन चुकी है। ऐसे धोखेबाज आपकी भावनाओं और लालच का फायदा उठाते हैं। आज के डिजिटल युग में जागरूकता ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है। सतर्क रहें, सूझबूझ से काम लें, और किसी भी अज्ञात स्रोत पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।


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