
बीजिंग, जून 2025:
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सुरक्षा परिषद सचिवों की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और निष्कलंक रुख अपनाने की जोरदार अपील की। बीजिंग में आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में डोभाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में कोई “अच्छा” या “बुरा” आतंकी नहीं होता — सभी प्रकार के आतंकवाद की समान रूप से निंदा होनी चाहिए।
आतंकवाद पर दोहरी नीति पर निशाना
डोभाल ने वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों में दोहरे मापदंडों की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ देश राजनीतिक लाभ के लिए आतंकी संगठनों को नजरअंदाज करते हैं या उन्हें छुपाते हैं, जिससे आतंकवाद को और अधिक बढ़ावा मिलता है। उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की ओर इशारा करता प्रतीत हुआ, जिस पर लंबे समय से भारत द्वारा आतंकी समूहों को शरण देने का आरोप लगाया जाता रहा है।
प्रतिबंधित संगठनों पर चिंता
NSA डोभाल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों — जैसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), अल-कायदा और आईएसआईएस — के लगातार सक्रिय रहने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद इन संगठनों की सक्रियता क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
भारत की दृढ़ नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग
डोभाल ने बताया कि भारत लंबे समय से एससीओ जैसे मंचों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के विरुद्ध स्पष्ट, निष्पक्ष और समन्वित नीति की वकालत के लिए करता आ रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ विश्व को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिसमें कोई भी देश रणनीतिक हितों की आड़ में जवाबदेही से बच न सके।
चीन के विदेश मंत्री से भेंट
बैठक से एक दिन पूर्व अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की और भारत का रुख दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एशिया की स्थिरता और विकास के लिए आतंकवाद के खिलाफ सच्ची और सामूहिक कार्रवाई अनिवार्य है।
निष्कर्ष
अजीत डोभाल का यह भाषण भारत की आतंकवाद के प्रति “शून्य सहनशीलता” नीति का एक सशक्त उदाहरण है। उनकी यह बात साफ थी कि यदि वैश्विक समुदाय आतंकवाद को खत्म करना चाहता है, तो उसे राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर ईमानदारी से एकजुट होना होगा।
मुख्य बिंदु:
- सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की अपील
- राजनीतिक लाभ के लिए “अच्छे-बुरे आतंकवाद” का भेद बंद करने की मांग
- संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सक्रियता पर चिंता
- चीन से द्विपक्षीय वार्ता में भारत की नीति दोहराई
यह बयान भारत के लिए न केवल एक कूटनीतिक संदेश है, बल्कि पूरे एससीओ और वैश्विक समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है कि अब आतंकवाद के खिलाफ नरमी नहीं बरती जा सकती।