
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन इन दिनों बड़े स्तर पर परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। लगभग ₹462 करोड़ की लागत से इसका कायाकल्प किया जा रहा है ताकि इसे एक वर्ल्ड-क्लास ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जा सके। इस परियोजना को रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसमें चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला — तीनों शहरों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने पर जोर दिया गया है।
विकास कार्यों की प्रमुख विशेषताएं:
- परियोजना क्षेत्रफल: कुल 1,92,248 वर्ग मीटर में फैला होगा स्टेशन, जिसमें 27,383 वर्ग मीटर नए ढांचे के लिए आरक्षित है।
- नई इमारतें: स्टेशन के दोनों ओर (चंडीगढ़ और पंचकूला साइड) G+3 मंजिला इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। इससे यात्रियों को दोनों दिशाओं से प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी, जिससे भीड़भाड़ कम होगी।
- डिजाइन में स्मार्ट एलिमेंट्स: यात्री सुविधाओं में वेटिंग लाउंज, फूड कोर्ट, स्मार्ट टिकटिंग सिस्टम, एलिवेटेड वॉकवे और मल्टी-लेवल पार्किंग जैसे तत्व शामिल होंगे।
परियोजना की प्रगति:
अब तक इस परियोजना का 81% कार्य पूरा हो चुका है, और उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर 2025 तक इसे पूरी तरह चालू कर दिया जाएगा। रेलवे मंत्रालय के राज्य मंत्री रवीनीत सिंह बिट्टू ने हाल ही में नई दिल्ली में इस परियोजना की समीक्षा की और समयबद्ध क्रियान्वयन का निर्देश दिया।
यात्री और स्थानीय लोगों को लाभ:
- दैनिक यात्रियों को आरामदायक सफर मिलेगा, खासकर जो मोहाली, पंचकूला और चंडीगढ़ के बीच रोजाना यात्रा करते हैं।
- लंबी दूरी के यात्रियों को भी आधुनिक सुविधाओं और बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इससे मजबूती मिलेगी, क्योंकि रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र एक नया व्यावसायिक केंद्र बन सकता है।
यह परियोजना सिर्फ एक इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड नहीं है, बल्कि यह चंडीगढ़ को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। जैसे-जैसे अक्टूबर 2025 नजदीक आता जा रहा है, पूरे उत्तर भारत की नजरें अब इस नये और अत्याधुनिक रेलवे स्टेशन पर टिकी हुई हैं।