
पेरिस, 25 जून 2025 — फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बार फिर यूक्रेन को लेकर फ्रांस की अडिग प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने रूस की लगातार सैन्य आक्रामकता और शांति प्रयासों से इनकार करने की कड़ी आलोचना की। यह बयान उन्होंने हाल ही में संपन्न नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात के बाद दिया।
मैक्रों ने विशेष रूप से डनिप्रो पर रूस द्वारा किए गए हालिया हमले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की, जिसमें कई निर्दोष नागरिकों की जान गई और आवासीय इलाकों को गंभीर क्षति पहुंची। उन्होंने कहा कि यूक्रेन तीन महीने पहले युद्धविराम के लिए तैयार था — यह प्रस्ताव अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर सामने आया था — लेकिन इसके बावजूद रूस ने शांति की हर संभावना को नकारते हुए लगातार बमबारी जारी रखी है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने तीखे शब्दों में कहा,
“यूक्रेन युद्धविराम के लिए तैयार था, लेकिन रूस अब भी शहरों पर हमले कर रहा है, नागरिकों की जान ले रहा है और अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन कर रहा है।”
उन्होंने रूस के मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की बार-बार की गई अवहेलना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों को दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रूस पर संयुक्त दबाव बनाने की दिशा में प्रयास जारी रखेगा।
“शांति तभी टिकाऊ होगी जब वह वैधता, जवाबदेही और यूक्रेन की सम्प्रभुता के सम्मान पर आधारित हो,” मैक्रों ने जोर देते हुए कहा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश रूस की बढ़ती आक्रामकता के विरुद्ध एकजुट होकर कदम उठाने की दिशा में प्रयासरत हैं। फ्रांस की ओर से यह कड़ा रुख यूरोप की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के समर्थन का स्पष्ट संकेत है।
राष्ट्रपति मैक्रों के इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि यूक्रेन संकट को लेकर फ्रांस अब और अधिक सक्रिय व निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है, जिसमें राजनयिक प्रयासों के साथ-साथ राजनीतिक दबाव का सहारा लिया जाएगा।
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