
नई दिल्ली, 25 जून 2025 — दिल्ली के दिल दहला देने वाले अपहरण कांड में पुलिस ने अपनी सूझबूझ और तत्परता से एक दो साल की मासूम बच्ची को सुरक्षित बचा लिया। यह घटना 23 जून की शाम की है, जब बच्ची जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास खेल रही थी और अचानक लापता हो गई। परिजनों की ओर से तत्काल सूचना देने पर पुलिस ने उच्च प्राथमिकता के तहत मामले की जांच शुरू की।
जांच के दौरान जामा मस्जिद थाना पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की गहनता से समीक्षा की। फुटेज में एक बुजुर्ग महिला बच्ची को मेट्रो स्टेशन की ओर ले जाते हुए नजर आई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पाया कि उक्त महिला बच्ची को लेकर जामा मस्जिद से उत्तम नगर ईस्ट मेट्रो स्टेशन तक गई।
पुलिस ने फौरन उत्तम नगर इलाके की निगरानी शुरू की और आखिरकार हस्तसाल के जे.जे. कॉलोनी इलाके में छापा मारकर बच्ची को 72 वर्षीय महिला हसीना के कब्जे से बरामद कर लिया। पुलिस ने महिला को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया और बच्ची को परिवार से मिलवा दिया। इस पूरे ऑपरेशन में दिल्ली पुलिस की केंद्रीय जिला टीम की भूमिका सराहनीय रही।
अदालत में दूसरा मामला भी सामने आया
उसी दिन एक और मामला सुर्खियों में आया जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के एक जवान भबानी चिब को अस्थायी गिरफ्तारी से राहत दी। भबानी पर एक पुरुष के अपहरण का आरोप लगा है, जिसकी शिकायत पीड़ित की पत्नी ने साकेत थाने में दर्ज कराई थी। न्यायमूर्ति मनीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने भबानी को जांच में पूरा सहयोग देने और 24 जून 2025 को शाम 5 बजे जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस से मामले की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट 3 जुलाई 2025 तक जमा करने का निर्देश भी दिया है।
यह घटनाएं न केवल दिल्ली पुलिस की सतर्कता और तकनीकी दक्षता को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी प्रमाणित करती हैं कि कानून व्यवस्था में तकनीक और तत्परता का संयोजन बेहद प्रभावी हो सकता है। एक ओर जहां एक बच्ची को समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया, वहीं दूसरी ओर न्यायालय भी अपने स्तर पर संवेदनशील मामलों में त्वरित हस्तक्षेप कर रहा है।
न्याय और सुरक्षा के इस संतुलन ने दिल्ली की जनता में कानून के प्रति विश्वास को और मज़बूत किया है।