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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद: वैश्विक शांति स्थापना में प्रमुख भूमिका


Anoop singh

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), संयुक्त राष्ट्र संगठन का सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली अंग है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। यह परिषद उन वैश्विक संकटों और संघर्षों से निपटने का कार्य करती है जो विश्व समुदाय को प्रभावित कर सकते हैं।

संरचना और सदस्यता

सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य देश होते हैं। इनमें से 5 देश स्थायी सदस्य हैं — चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका। इन पांचों के पास वीटो अधिकार होता है, यानी यदि इनमें से कोई भी देश किसी प्रस्ताव के खिलाफ वोट देता है, तो वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता, चाहे अन्य सभी सदस्य उसके पक्ष में हों।

बाकी 10 सदस्य देश अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। इनका चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।

भूमिका और शक्तियाँ

अन्य संयुक्त राष्ट्र अंगों के मुकाबले, सुरक्षा परिषद के निर्णय बाध्यकारी होते हैं। इसका मतलब है कि इसके द्वारा पारित प्रस्तावों को सभी 193 सदस्य देशों को मानना अनिवार्य होता है। यह परिषद निम्नलिखित कार्यों के लिए अधिकृत है:

अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में हस्तक्षेप करना

शांति स्थापना मिशनों को मंजूरी देना

प्रतिबंध लगाना या सैन्य कार्रवाई की अनुमति देना

युद्धविराम समझौते की निगरानी करना

हथियारों के प्रसार पर रोक लगाने के उपाय सुझाना

महासचिव की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद की बैठकों में भाग ले सकते हैं और संबंधित रिपोर्ट या सुझाव दे सकते हैं, लेकिन वे परिषद के निर्णयों को नियंत्रित नहीं करते। निर्णय केवल सदस्य देशों के वोट के आधार पर लिए जाते हैं।

चुनौतियाँ और आलोचनाएँ

हालांकि सुरक्षा परिषद का उद्देश्य शांति और स्थायित्व बनाए रखना है, लेकिन वीटो शक्ति के दुरुपयोग और कुछ स्थायी सदस्यों के एकतरफा हितों को लेकर समय-समय पर इसकी आलोचना भी होती रही है। विकासशील और अफ्रीकी देशों की ओर से लंबे समय से परिषद में सुधार की मांग की जा रही है, ताकि यह ज्यादा लोकतांत्रिक और समावेशी बन सके।

निष्कर्ष

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने का एक केन्द्रबिंदु है। हालांकि इसकी संरचना और प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है, फिर भी यह संस्था आज भी विश्व संघर्षों को रोकने और समाधान खोजने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


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