
चित्रकूट, उत्तर प्रदेश/मध्यप्रदेश सीमा — आषाढ़ मास की अमावस्या के पावन अवसर पर चित्रकूट में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह से ही उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं का जनसैलाब कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा और मंदाकिनी नदी में स्नान करने के लिए उमड़ पड़ा। यह पावन अवसर धार्मिक आस्था और परंपराओं से गहराई से जुड़ा होता है, जिसमें स्नान, पूजन और परिक्रमा का विशेष महत्व है।
चित्रकूट के धार्मिक स्थलों पर विशेष रूप से कामदगिरि परिक्रमा मार्ग, जानकी कुंड, भरतकूप, सती अनुसुइया आश्रम और मंदाकिनी घाट पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु कई किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े नजर आए। लोग घंटों लाइन में खड़े रहकर भगवान मतगजेंद्रनाथ, कामतानाथ और अन्य देवी-देवताओं के दर्शन कर रहे हैं।
भीड़ इतनी अधिक है कि देर रात से ही श्रद्धालु मंदिर परिसर और घाटों पर डेरा जमाए हुए हैं। मंदाकिनी नदी में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते सुरक्षा और सफाई व्यवस्था पर भारी दबाव देखा गया। नगर प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन भीड़ नियंत्रण में पूरी तरह सफल होती नहीं दिखी।
भीड़भाड़ और अव्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ रहा है। सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई है और बस स्टैंड से लेकर मंदिर तक पैदल चलना भी श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल होता जा रहा है। कई बुजुर्ग और महिलाएं थकान के कारण रास्ते में ही बैठने को मजबूर हो गए।
फिर भी श्रद्धालुओं की आस्था अटूट है। श्रद्धा और विश्वास के साथ हजारों लोग अपने कष्ट भूलकर भगवान कामतानाथ के चरणों में शीश नवाने पहुंचे हैं। आषाढ़ अमावस्या पर यह दृश्य चित्रकूट की आध्यात्मिक महत्ता और सांस्कृतिक जीवंतता को उजागर करता है।
प्रशासन और मंदिर समिति से अपेक्षा की जा रही है कि वे भविष्य में ऐसे अवसरों पर व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएं ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े और वे अपने धार्मिक कर्तव्यों को श्रद्धा व शांति से निभा सकें।